अंधभक्त किसे कहते हैं – अंधभक्त की परिभाषा (Andhbhakt kise kahate hain)

अंधभक्त किसे कहते हैं (Andhbhakt kise kahate hain) यह एक ऐसा इंसानी रूप में दिखने वाला जीव होता है, जिसे किसी व्यक्ति विशेष के साथ उसकी भावना जुड़ी हुई रहती है और वह उसके देशहीत में नकारात्मक बात को भी सकारात्मक बात की तरह बोलता है।

जब भी उस व्यक्ति (अंधभक्त) के सामने उस व्यक्ति विशेष की गलत विचार और गलत नीति के बारें में बोली जाती है या फिर उसकी थोड़ी-बहुत बुराई की जाती है तब यह इंसानी रूप में दिखने वाला जीव गुस्सा होकर अपना आपा खो बैठता है, जिसे हम अंधभक्त के नाम से जानते है।

 

अंधभक्त किसे कहते हैं
अंधभक्त किसे कहते हैं

 

भगवान को पुजा करने वालें को भक्त और पाखंडियों को पुजा करने वालें को हम अंधभक्त कह सकते है। इन दिनों इंटरनेट पर अंधभक्त को “तीन आत्माओं का मिलन बताया गया है, जो इंसान, गधा और कुत्ता प्रमुख है। जब यह तीनों योनि एक साथ मिलती है तब किसी अंधभक्त का जन्म होती है।“

यह जीव मनुष्य की तरह ही जीते है, उनके तरह दिखते और उनके तरह चलते-फिरते भी है, परंतु इनमें गधा और कुत्ता जैसे प्रमुख जीवों का गुण मिली हुई रहती है,

जिससे इनके अंदर सोचन शक्ति बहुत ही कम या नही के बराबर होती है। इनके पूजनीय व्यक्ति द्वारा कही गई हर बात इनको स्वर्ग की तरह सुंदर लगती है,

लेकिन वास्तविकता में वह नरक और कचरे के समान होती है। जिसे अधिकतर लोग पसंद नही करते, परंतु इन्ही नन्हें-मुन्ने अंधभक्त के कारण वह अंधकार में रहते है और लोगों को उलझन में डालकर गलत जानकारी उन तक पहुँचाते है।

भक्त शब्द हिन्दू धर्म और हिन्दू शास्त्र में इस्तेमाल की गई है, लेकिन इसमें कहीं पर भी अंधभक्त जैसी शब्द का या इससे संबन्धित किसी भी चीज का जिक्र नही की गई है।

यह एक मानवीय और काल्पनिक नवीन शब्द है, जो आज इंटरनेट पर हमें हर दिन सुनने को मिलता है।

जब भी सोश्ल मीडिया अकाउंट खोली जाती है तब कही ना कही अंधभक्त/गोबर भक्त इत्यादि जैसे प्रचलित शब्द दिखने को मिल ही जाते है। ऐसे प्राणी आज पूरे इंटरनेट पर अपनी गंध फैला कर रख दिये है जिससे यह खूब सर्च भी किए जाते है।

आपने भी अंधभक्त  जैसे शब्द के बारें में जरूर सुना होगा, लेकिन बहुत सारें लोग इस शब्द के बारें में नही जानते है और वह इंटरनेट पर अंधभक्त किसे कहते है ? या Andhbhakt kise kahte hain के बारें में सर्च करने आते है। इंटरनेट पर उनको जवाब तो मिलती है लेकिन सटीक जवाब नही मिल पाती है,

इसलिए हम आप जैसे श्रोता के लिए अंधभक्त किसे कहते हैं । Andhbhakt Kise Kahate Hain के बारें में यह लेख लेकर आए है, जिसमें आप इससे संबन्धित सभी चीजों को तो जान ही सकते है और साथ ही राजनीति में अंधभक्त किसे कहते हैं। Rajniti men Andhbhakt Kise Kahate Hain  के बारें में भी पढ़ सकते है।

 

विषय

अंधभक्त किसे कहते हैं। Andhbhakt Kise Kahate Hain

गूगल के अनुसार अंधभक्त की परिभाषा “अंध भक्तों का निर्माण तीनों आत्माओं से मिलकर होता है इंसान गधा और कुत्ता। इन तीन योनि से मिलकर एक अंधभक्त का जन्म होता है।

यह इंसान की  तरह चलते हैं फिरते हैं परंतु इनमें सोचने और समझने की शक्ति एक गधे के समान बिल्कुल कम होती है।

हमारे अनुसार अंधभक्त की परिभाषा के अनुसार यह एक ऐसा अंध विश्वासी मानव रूपी जीव होता है, जिसमें असत्यधर्मी, मिथ्याधर्मी और वहमी होता है।

जो धर्म विषय मे मिथ्या विचारों से भरा हुआ रहता है। जिसमें किसी भी चीज पर आँख बंद करके विश्वास करने का हुनर होती है

साथ ही उनमें विश्वास करने की कदर इस तरह होती है कि सभी पहलुओं को बिना ध्यान में रखे बिना गलत को भी सही कह देता है। वह एक ऐसे व्यक्ति विशेष का पुजारी (कपटी) होता है जो खुद पहले अंधभक्त के भाँति थे और बाद में उनको किसी बड़े पद मिल गई।

ऐसे अंधभक्त आत्मा को दुसरे की बात हमेशा बुरी ही लगती है और उनके व्यक्ति विशेष की हर बात स्वर्ग की तरह सुंदर लगती है।

जो उनकी कमियों पर बिना चर्चा, विचार-विमर्श किए बिना ही उसके हर बात को इस तरह गुणगान करना जैसे पूरी दुनिया की सारी अच्छाई सिर्फ उसी के अंदर है।

अंधभक्ति किसी भी चीज, वस्तु या व्यक्ति विशेष के साथ हो सकती है। जब कोई भगवान की पुजा-अर्चना करता था तब हम उसे ईश्वर के प्रति भक्ति-श्रद्धा के नाम से जानते थे और ऐसे व्यक्ति को भगवान का भक्त, पंडित, पुजारी कहते थे,

लेकिन दुनिया में भक्त की एक नई प्रजाति ने जन्म ले लिया है, जिसे अंधभक्त के नाम से जानने लगा है। ऐसा कहा जाता है कि इस शब्द की शुरुआत वर्ष 2014 के बाद से हुई, जिसने राजनीति में पूर्ण सक्रिय हो कर धर्म के नाम पर देश का सिर्फ बुरा ही चाहा है, कुछ कदमे ठीक है, परंतु अधिकतर विचार तनाशाह के जैसे है।

 

राजनीति में अंधभक्त किसे कहते है ? Politics Aandhbhakt kise kahte hai

एक नई शब्द अंधभक्त राजनीति के कारण ही उत्पन्न हुई है। हमारे धर्म की किताबों के अनुसार भक्त वह होता है जो अपने माता, पिता, और अपने शिक्षकों से बहुत ही ज्यादा प्यार करता है और उनका बहुत ही ज्यादा आदर भी करता है। इसी प्रकार भक्तों भी बहुत सारे प्रकारों के होते हैं,

जैसे माता की सेवा करने वाला मातृ भक्त, गुरु की सेवा करने वाला गुरु भक्त, देश की सेवा करने वाला देश भक्त आदि। दुनिया में बहुत प्रकार के भक्त है जिनमें एक इसकी नई प्रजाति राजनीति अंधभक्त भी है।

जो आपको सोश्ल मीडिया, अपने आस-पास, पड़ोसी, दोस्त, रिश्तेदार के रूप में देखने को मिल सकती है।

अंधभक्त दो शब्दों से मिलकर के बना हुआ है अंध और भक्त,  अंधभक्त में अंध का मतलब (अंधभक्त का अर्थ) अंधा होता है और भक्त का मतलब उसकी पूजा करने वाला होता है  या उसी की बातों को मानने वाला, उसी की बातों को सुनने वाला और जैसा वह कहे उसके अनुसार कार्य करने वाला अंधभक्त होता है।

जब दोनों शब्दों को आपस में मिलाया जाती है तब अंधभक्त बनता है। अंध भक्त का मतलब ( अंधभक्त का अर्थ ) होता है एक ऐसा व्यक्ति जो की आंखें बंद करके जो भी अगले वाला कहेगा उस पर भी विश्वास कर लेता है और जो अगले वाला कहेगा वैसा ही करेगा। ऐसा व्यक्ति अंधभक्त व्यक्ति होता है।

राजनीति के अंदर अंधभक्त का मतलब ऐसा व्यक्ति जो भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र दामोदर दस मोदी यानि नरेंद्र मोदी को अपना आदर्श मानते है

और उनके हर बात को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर उनके ही अच्छे-बुरे बातों की भक्ति कर उनका समर्थन करते है, उसे राजनीतिक अंधभक्त कहते है।

हम ऐसा बिलकुल भी नही कर कह रहें है कि जो व्यक्ति बीजेपी और नरेंद्र मोदी के साथ इस पार्टी के बड़े नेता को अपना आदर्श मानते है, उसे अंधभक्त कहते है, बल्कि अंधभक्त तो वह है जो सरकार की असफलता और विफलता को भी ऐसे लोगों के सामने प्रकट करता है, जैसे गरीब होना भी देशहित मे है।

जो लोग बीजेपी पार्टी के हर एक फैसले को सही मानते है और चुनाव के अंदर बीजेपी के द्वारा टिकट देने वाले उम्मीदवार को बिना सोचे समझे हो वोट देते है उसे अंधभक्त कहते है। बीजेपी के हर समर्थन अंधभक्त नही होता और हर समर्थन अंधभक्त भी नही होता।

देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी काँग्रेस के अनुसार अंधभक्त वह होता है जो भाजपा का हर बात का समर्थन करता हैकाँग्रेस का मानना है कि बीजेपी सरकार गरीब जनता, किसान, देशहीत के हित मे कोई सही फैसला नही लेती है, झूठे वादे करके जनता को लुभाती है और वोटबैंक की राजनीति करता है।

इस तरह वैसा व्यक्ति जो सभी प्रकार के सरकारी आँकड़ा को नज़रअंदाज़ करते हुये सिर्फ हवा-हवाई बातों को ही विकास समझता है और आँख बंद करके अपनी पसंदीदा राजनीति पार्टी पर विश्वास कर जनता के बीच भ्रमजाल फैलाता है और उसका समर्थन करता है, उसे अंधभक्त कहते है।

 

मोदी अंधभक्त कौन होते हैं ? Modi andh bhakt kaun se hote hain?

Modi Andh Bhakt वैसा व्यक्ति जो सिर्फ नरेंद्र मोदी के द्वारा कही गई बातों को ही सही मानता हो, उनकी हर फैसला को भगवान के किस्मत की लकीर मानता हो उसे मोदी अंधभक्त कहते है। मोदी और अंधभक्त का कनेकसन बाप-बेटे की तरह है।

भारत की दूसरी राजनीतिक विपक्षी पार्टी उन सभी लोगों को Andhbhakt कहकर बुलाता है, जो मोदी और मोदीबाद के भावनाओं से प्रेरित है। जिस विपक्षी पार्टी काँग्रेस ने भारत पर 70 साल अपनी सरकार चलाकर शासन किया और यहाँ हजारों विकास की काम किया,

उसी सरकार के नेता सब को बीजेपी के लोग देशद्रोही और आतंकवादी जैसे शब्द का इस्तेमाल कर ररहें है। सोचनीय बात यह है कि काँग्रेस के द्वारा बनाई गई देश की संपत्ति को मोदी सरकार बेच रही यानि उसका निजीकरण कर रही है और अंधभक्त इसे देशहीत में सही बता रहें है।

महँगाई पचास फीसद अधिक बढ़ गई है गरीब, मध्यवर्ग के लोगो की घर की बजट आय से अधिक हो गई है, बेरोजगारी बढ़ रही है, तनाशाह बढ़ रही है, किसान सड़क पर है और इन सब संवेदनशील मुद्दे पर अंधभक्त जैसे मानवरूपी जीव इसे देशहीत के लिए सही बता रहें है।

 

मोदी जी को आदर्श मानने वालों को अंधभक्त क्यों कहते है।

जब शुरू-शुरू में जर्मनी में हिटलर का शासन हुआ करता था, तब लोग उनके तनाशाह को जर्मनी के हित में बताते थे और हिटलर का पुरजोड़ समर्थन करते थे,

लेकिन वह हीटर जब अपने ही देश के लोगों पर आत्याचार करने लगा तब लोगो को समझ में आ गई हिटलर जर्मनी के लिए सही नही है,

लेकिन तब तक हिटलर अपने यहाँ के जनता को कठपुतली बना के रखा हुआ था, जिससे लोगों को मुक्ति उसके मरने के बाद ही मिला।

विपक्षी पार्टी और भारत के करोड़ों लोग मोदीजी के समर्थक को अंधभक्त बुलाते है, क्योंकि उनका मानना है मोदी भी आगे हिटलर की तरह भारत का तनाशाह बनाना चाह रहें है।

“जब तक जर्मनी बर्बाद न हो गया, तब तक जनता को हिटलर के हर काम में देशभक्ति ही नज़र आती थी” यह सटीक पंक्ति आज वर्तमान भारत को देखते हुये सही बैठ रहा है।

 

क्या बीजेपी कार्यकर्ता अंधभक्त है। Andh Bhakt Kise Kahate Hain

ऐसा बिलकुल भी नही है कि जो लोग बीजेपी का समर्थन करते है या फिर उनका कार्यकर्ता है वह अंधभक्त है, बेशक बीजेपी में भी बहुत पहले और अभी भी बहुत समझदार नेता रहें है,

जिनमें अटल बिहारी बाजपेयी और वर्तमान में नितिन गडकरी जैसे बहुत सारें नेता के पास अच्छे विचार और कंट्री डेवेलोपिंग मोडेल है।

हम ये भी नही कर सकते है कि सिर्फ बीजेपी के समर्थक ही अंधभक्त है, वैसा सभी लोग अंधा-भक्त है जो अपने सोचन-शक्ति का इस्तेमाल किए बिना ही गलत को सही और सही को गलत करार दे और किसी आँकड़े पर विश्वास नही करके सिर्फ हवा हवाई बात को ही विकास मानते, वह अंधभक्त है।

आप किसी भी राजनीतिक पार्टी का समर्थक या कार्यकर्ता रहिए, लेकिन याद रखिए सही को सही और गलत को गलत बोलना चाहिए, क्योंकि अगर आप गलत चीज को सही करार देते हुये भी उसका समर्थन करते है और लोगों को इसके भ्रमजाल में उलझाते है, तब आप देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे है।

 

हिन्दू धर्म के अनुसार अंधभक्त किसे कहते है। Andh Bhakt Kise Kahate Hain

सबसे पहली बात यह है कि हिन्दी धर्म और शास्त्र में अंधभक्त जैसी शब्द का इस्तेमाल किया ही नही गया है, वैसे इसमें भक्त शब्द का इस्तेमाल कई जगह पर किया गया है, जिसमें गुरु को पुजा करने वालें को गुरुभक्त, माता की पुजा करने वालें को मातृभक्त,

पिता को पुजा करने वालें को पितृभक्त और भगवान की पुजा करने वालें को सिर्फ भक्त के साथ सम्बोधन किया गया है। हिन्दी धर्म में पित्र भक्त, गुरु भक्त मात्र भक्त या फिर देश भक्त सबसे प्रमुख है। अंधा उसे बोला जाता है जो देख नही सकता है,

लेकिन जिसके पास आँख होते हुये भी देकर उस बात को अनदेखा करता है और किसी व्यक्ति विशेष का समर्थन करता है, उसे अंधभक्त कहा जाता है।

ऐसे लोग समाज और देश का सिर्फ दिखावटी विकास ही चाहते है वह धरातल पर विकास देखना नही चाहते है।

अंधभक्त हिन्दू धर्म को अपना धर्म बताकर हिन्दू के बीच वोटबैंक की राजनीति और धार्मिक भावनात्मक बात करके अपना दुकान चलाते है।

जो हमारें वर्तमान देश और आने वालें पीढ़ी के लिए सही नही है। हिन्दू धर्म सभी धर्म को एक साथ मिलजुलकर रहने की सीख देती है, जिस पर ही हमें अमल करना चाहिए।

 

गूगल के अनुसार अंधभक्त किसे कहते है।  Google Andhbhakt Kise Kahate Hain

गूगल के अनुसार अंधभक्त तीन आत्माओं का मिलन है, इंसान, गधा और कुत्ता। इन तीनों योनियों से मिलकर एक अंधभक्त बनता है। ये मनुष्य की तरह दिखते, चलते-फिरते है, परन्तु इनकी प्रवृति गधे वाली होती है मतलब इनमें ख़ुद में सोचने समझने की शक्ति बहुत ही कम होती है।

राजनीति भाषा में बतायें तो “बीजेपी समर्थक तीन आत्माओं से मिलकर बनें होते है, इंसान, गधा और कुत्ता। जब यह तीनों योनियों का मिलन होती है तब किसी बीजेपी समर्थक (अंधभक्त) का जन्म होता है।” भाषा की मर्यादा को रखते हुये इस शब्द किसी भी पार्टी के समर्थक के लिए इस्तेमाल करना उचित नही होगा।

 

अंधभक्त का पिता किसे कहते है?

जैसा की आपको पता होगा भारतीय जनता पार्टी नरेंद्र मोदी जी के नेतित्व में ही इतना आगे बढ़ी है और इसने कई राज्य में जीत का प्रदर्शन कर पिछले दो बार से लगातार लोकसभा का चुनाव जीतती आ रही है।

लोगों के अनुसार यह सब सिर्फ और सिर्फ नरेंद्र मोदी जी के कारण ही हो पा रही है,

क्योंकि वही बीजेपी को देश के नेतित्व में आगे लेकर जा रहें है और हर कोई नरेंद्र मोदी का दीवाना है और जो सबसे ज्यादा दीवाना है उसे अंधभक्त के नाम से जाना जाने लगा है

इस तरह अंधभक्त का पिता नरेंद्र मोदी है। इसके अलावा जब कोई व्यक्ति किसी व्यक्ति विशेष पर अपने से ज्यादा विश्वास करने लग जाए, तब वह उसका अंधभक्ति पिता के समान होती है।

 

अंधभक्त कैसे होते है?

दुनिया में हर कोई भक्त है, लेकिन राजनीति की नजरिया से अंधभक्त सिर्फ भारत में ही वास करते है। हम सब ईश्वर के भक्त है और कुछ लोग जो सत्ताधारी का इतना बड़ा समर्थक हो जाता है कि उसके हर कदम को सही मान लेता है जो वास्तव में सही होता भी नही है।

अंधभक्त भी इन्सान ही होता है चाहे वह पढ़ाई का अंधभक्त हो, गाने का अंधभक्त हो, खेलने का अंधभक्त हो या फिर राजनीति पार्टियां का अंधभक्त हो। किसी भी चीज का उतना ही बड़ा भक्त बनना चाहिए, जिससे आपके नाम के पहले अंध शब्द ना जुड़े।

 

अंधभक्त के लक्षण

अंधभक्त के लक्षण इस प्रकार है: –

  • अंध भक्त किसी की भी सुनता नहीं है।
  • अंधभक्त को जो बोला जाए वही करता है।
  • अंध भक्तों का किसी पार्टी से कोई लेना देना नहीं होता है।
  • अंध भक्तों का कहीं ना कहीं स्वार्थ जुड़ा हुआ होता है।

 

राजनीति अंधभक्त कितने प्रकार के होते है ‌

राजनीति अंधभक्त के प्रकार निम्न है: –

  • धर्म के अंधभक्त
  • जाति के नाम पर अंधभक्त
  • देश के नाम पर अंधभक्त
  • किसी नेता के नाम पर अंधभक्त
  • किसी राजनीतिक पार्टी के अंधभक्त
  • मोदी के अंध भक्तों
  • केजरीवाल के अंधभक्त
  • राहुल गांधी के अंधभक्त
  • किसी व्यक्ति विशेष का अंधभक्त

 

अंधभक्त किसे कहते है Wikipedia

किसी भी व्यक्ति द्वारा कही गई बातों पर बिना विचार किए तुरंत विश्वास कर लेना अंधविश्वास कहलाता है। इससे भी आगे विशेष व्यक्ति के आदेश को बिना सोचे समझे पालन करना अंधभक्ति कहलाता है तथा पालनकर्ता को अंधभक्त कहा जाता है।

 

अंधभक्त किसे कहते हैं in English   

अन्धभक्त को हिंदी में “अन्धविश्वासी, अंधभक्त, अंधराष्ट्रवादी” कहते है, इसके अंग्रेजी में बहुत सारे अर्थ और इसकी मीनिंग होती है। इसका सही अर्थ “ आँख मूँदकर किसी पर श्रद्धा रखने वाला व्यक्ति या फिर ऐसा भक्त जो किसी विरोधी तर्क को न सुने उसका विरोध करे या फिर अंधविश्वासी भी कह सकते है। इंग्लिश में इसे “Superstitious, Worshippers” कहते है।

 

भक्त और अंधभक्त में अंतर

  • भक्त हमेशा भगवान का होता है और अंधभक्त किसी व्यक्ति विशेष के प्रति उसकी हर बात को पत्थर की लकीर के जैसे सही बतलाता है।
  • ईश्वर के भक्त को अपने आप पर भरोसा होता है, जबकि अंधभक्त को ख़ुद पर भरोसा ना के बराबर होती है।
  • भक्तों के मन में कोई लालच स्वार्थ कुछ भी छुपा नहीं होता है और वह निस्वार्थ ईश्वर की भक्ति में लगा रहता है, जबकि अंधभक्तों का अपना लालच और स्वार्थ छुपा होता है। वह उसी स्वार्थ और लालच के चलते हुए अंधभक्त बना रहता है।
  • भक्त ईश्वर के रचयिता होते है, जबकि अंधभक्त कपटी मानवरूपी सामाजिक कीड़ा होते है।

 

अंधभक्त कैसे पैदा होते हैं ? Andh bhakt paida kaise hote hain

अंधभक्त का जन्म कैसे होता है ? जब किसी व्यक्ति को कोई व्यक्ति बड़ा उपकार या सेवा कर देता है उसके बाद आगे चलकर वह सेवा देने वाला व्यक्ति किसी बड़े पद पर चयनित हो जाता है तब उनको अपने अहसानों तले रहने के लिए अंधभक्ति करनी होती है।

गूगल के अनुसार अंधभक्त इन्सान, गधा और कुत्ता के आत्मा से मिलकर बना होता है जो हर समय अपने सत्ताधारी की चापलूसी करते रहता है।

जिसके अंदर धर्म नाम का कीड़ा पनपती है और कोई राजनीतिक पार्टी धर्म के नाम पर सबको अलग करने लग जाता है तब अधिकतर की संख्या में अंधभक्त का जन्म हो जाती है।

 

लोग अंधभक्त कैसे बन जाते हैं?

जब किसी इंसान की दूसरे इंसान या धर्म के लिए आदर का भाव बहुत ही ज्यादा बढ़ जाता है, और वह उनकी हर गलत बात को भी सच मान कर जिने लगते हैं, और हर इंसान से उनके गुणगान करने लगते हैं तब वह इंसान अंधभक्त बन जाता है।

हम में से कोई भी अंधभक्त बन सकता है किसी भी इंसान या धर्म के लिए। इसलिए हमें हमेशा अपने दिमाग का इस्तेमाल करना चाहिए और किसी की बातों में न आकर इस बात को लेकर अपना जवाब ढूंढना चाहिए।

 

FAQ’s about Andhbhakt kise kahate hai

सवाल :- अंधभक्त की परिभाषा क्या है?

वैसा प्राणी जो किसी व्यक्ति या पार्टी विशेष को अपना आदर्श मानकर उसके द्वारा कही गई हर बात को बिना तथ्य जाने बगैर उस पर विश्वास कर लेता है और किसी भी आँकड़ा को झुठला देता है और इसका विरोध करने वालें पर तंज़ कसता है, उसे अंधभक्त कहते है।

सवाल :- अंधभक्त क्या होता है?

कोई इंसान जिसके पास गधे जितना दीमाग होने के बावजूद जब कुते की तरह भौंकता रहता है तो उस 3 आत्माओं से मिलकर बने इंसान को अंध भक्त कहा जाता है। ऐसा मानवरूपी कीड़ा समाज का कभी भला नही चाह सकते है और उनका मकसद सिर्फ लोगों को दावा कर रखना होता है।

सवाल :- गोबर भक्त किसे कहते हैं?

आजकल अंधभक्त को एक और नई नाम गोबरभक्त मिल गई है। जिस तरह गोबर में कीड़े पर जाते है उसी तरह वैसे व्यक्ति जो अंधभक्ति में लीन हो, उसके भी दिमाग में कीड़े पर जाते है, उसे गोबर भक्त कहते है।

सवाल :- राजनीतिक अंधभक्ति शायरी

  • अगर प्रधानमंत्री की आलोचना करना देशद्रोह है, तो मोदी ने ये काम 2014 से पहले 10 सालो तक किया है।
  • अंधभक्ति इतनी बढ़ चुकी है कि शाह मोदी तक तो ठीक था अब तो मुकेश अंबानी या गौतम अडानी को कुछ कह दो तो नारंगी कच्छे बुरा मान जाते है।
  • इतिहास में ये पहला ऐसा दौर है.. जहा रोटी, कपड़ा, मकान, GDP और रोज़गार की बात करने वाले को “देशद्रोही”कहा जाने लगा है।

 

Conclusion

आज हम ने अंधभक्त किसे कहते हैं ? (Andhbhakt kise kahate hain)  के बारें में जाना। आशाकरते है आप मोदी अंधभक्त कौन होते हैं ? Modi andh bhakt kaun se hote hain? की पूरी जानकारी जान चुके होंगे।

आपको लगता है कि इसे दूसरे के साथ भी Share करना चाहिए तो इसे Social Media पर सबके साथ इसे Share अवश्य करें। शुरू से अंत तक इस Article को Read करने के लिए आप सभी का तहेदिल से शुक्रिया…

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