कान बहने की अंग्रेजी दवा का नाम – कान बहना : लक्षण, कारण, उपचार

कान बहने की अंग्रेजी दवा का नाम : मानव शरीर का कान एक नली द्वारा नाक के पिछले तथा गले के ऊपरी भाग के जुड़ी हुई रहती है, जब भी इसके मध्य आने वाली अंग नाक या गला में कोई समस्या आती है या फिर कान में कोई बाहरी चीज गलती से चली जाती है

तब वह सूजन का रूप ले लेती है, जिससे मानव कान के अंदर लगे ट्यूब बंद हो जाती है और वह इसके भीतरी हिस्से में एक अलग किस्म का तरल पदार्थ को बनाने लग जाती है। जब इसकी मात्रा अधिक हो जाती है तब कान के पर्दे से होकर बाहर की ओर निकलने लग जाती है।

जो कान बहना – Ear discharge in Hindi के नाम से जानी जाती है। जिसमें गोल्डेन किस्म का सफ़ेद पदार्थ या गंदगी तरल या द्रव्य के रूप में निकलने लग जाती है। जो एक सामान्य बीमारी के रूप में जानी जाती है,

लेकिन इसका उपचार सही समय पर नही करवाई गई, तब यह बहरेपन और शारीरिक तनाव जैसी समस्या को उत्पन्न कर देती है।

एक रिपोर्ट कहती है कि भारत में हर 1 हजार पर 42 लोगों में कान बहने की समस्या आती है और यह अधिकतर गरीब बच्चों में ही देखी जाती है जो अपने शरीर का देखभाल सही तरीके से नही कर पाते है।

ऐसे बहुत मामले भी है जिसमें सामान्य लोगों को भी कान बहने के लक्षण आने लगते है। आपको भी अगर ऐसी समस्या हो गई है और आप इंटरनेट पर कान बहने के अंग्रेजी दवा का नाम Drop के बारें में जानना चाहते है, तब आपको यह आर्टिकल पूरी पढ़ना चाहिए।

 

कान बहने की अंग्रेजी दवा का नाम
kan bahne ki dawa ka naam

 

कान बहने की अंग्रेजी दवा का नाम – कान बहना : लक्षण, कारण, उपचार

हमारा कान मुख्य रूप से तीन भागों से मिलकर बना होता है। पहला, बाहरी हिस्सा है जिसमें पिन्ना व कैनाल आते हैं दूसरे हिस्से में कान के पर्दे के पीछे स्थित तीन सूक्ष्म हड्डियाँ होती हैं। इसमें मेलियस, इंकस, स्टेपिस के अलावा यूस्टेशियन ट्यूब होती है।

तीसरे (आंतरिक) भाग लेबिरिन्थ में कैनाल व सूक्ष्म संरचना होती है। इस संरचना यानी ट्यूब के बंद होने से कान बहने जैसी समस्या सामने आती है।

कान बहने को मेडिकल भाषा में ओटोरिया (Otorrhea ear drainage) कहते हैं। इसमें कान से तरल पदार्थ का रिसाव होने लगता है।

कान बहने को हल्के में नहीं लेना चाहिए क्योंकि, इसे अनुपचारित छोड़ दिया गया तो इन्फेक्शन फैल सकता है।

कान बहने के कारण आपको एक साथ कई अन्य समस्याएँ हो सकती हैं जैसे बुखार और सिरदर्द। ज्यादातर मामलों में कान बहने का कारण इयर वैक्स होता है।

इयर वैक्स एक ऑयल है जिसे हमारा शरीर प्राकृतिक रूप से बनाता है इयर वैक्स सुनिश्चित करता है कि कान में किसी प्रकार का बैक्टीरिया और धूल अंदर न जाने पाए।

कभी-कभी यह कान से बहने लगता है। कान के परदे फट जाने की वजह से भी कान से तरल पदार्थ या खून का रिसाव हो सकता है।

अगर कान से खून का रिसाव हो रहा है तो यह कान के भीतर किसी बड़ी चोट या इन्फेक्शन की ओर इशारा करता है।

इस दौरान आपको तुरंत मेडिकल ट्रीटमेंट की जरुरत होती है हालांकि, कान बहने का इलाज इसके कारण पर निर्भर करता है लेकिन, कुछ सामान्य स्थितियों में आप घरेलू उपचार से इसे ठीक कर सकते हैं।

 

कान बहने के प्रकार – Types of Ear Discharge in Hindi

कान बहना भी कई तरह के होते है, जिसमें आपके कान से खून, गोल्डेन सफ़ेद पदार्थ अन्य द्रव पदार्थ शामिल है, लेकिन अधिकतर मामलों में इयर वैक्स ही कानों के द्वारा निकलती है। कान बहने के प्रकार को अब तक छ: प्रकारों में विभाजित की गई है: –

  1. खून: – कई बार ईयर कैनाल में छोटी चोट या खरोच से कभी-कभी खून की थोड़ी बहुत मात्रा निकलने लगती है हालांकि, ईयरड्रम के क्षतिग्रस्त होने से भी आपको कान से खून निकलने की समस्या हो सकती है। इस समस्या में आपको डॉक्टर की मदद ही लेनी चाहिए।
  2. वैक्स: – कान से ईयरवैक्स निकलना आम और सामान्य है और यह ईयरवैक्स सफेद, पीले या गहरे भूरे रंग का हो सकता है। कान संक्रमण से बचने के लिए ईयरवैक्स का उत्पादन करता है और जब ईयरवैक्स तक नहाते या स्विमिंग करते हुए पानी पहुंच जाता है, तो यह कान से बहने लगता है।
  3. पानी: – कान से पानी निकलने का मतलब है कि कान के अंदर पानी इकट्ठा हो गया है। यह पानी नहाने या स्विमिंग करने के दौरान कान में जा सकता है हालांकि, यह समस्या सामान्यतः एक दिन के करीब रहती है।
  4. मवाद या पास: – कान से मवाद या पस निकलने की समस्या ईयर कैनाल या मिडिल ईयर में इंफेक्शन का संकेत हो सकता है। सर्दी, सामान्य फ्लू या चोट की वजह से कान में संक्रमण की समस्या हो सकती है।
  5. स्विमर्स ईयर्स रिसाव: – स्विमर्स ईयर्स के प्रारंभिक लक्षण में कान में खुजली होती है. बाद के लक्षणों में सफेद व पानी वाला रिसाव होता है यह मुख्य रूप से तैराकों को और गर्मी के समय में होता है।
  6. कान में किसी वस्तु का जाना: – कभी-कभी छोटे बच्चे अनजाने में अपने कान में कुछ छोटी वस्तूएं डाल लेते हैं. यह बाद में इंफेक्शन का रूप ले लेती है और पस के रंग का रिसाव हो सकता है।

 

कान के संक्रमण के प्रकार – Types of ear infections

मानव कान तीन भाग बाहरी कान, मध्य कान और आंतरिक कान में विभाजित होती है।

इन तीन भागों में से कोई भी बैक्टीरिया, फंगस या वायरस से संक्रमित हो सकता है। बच्चे विशेष रूप से मध्य कान के संक्रमण ओटिटिस मीडिया से ग्रस्त होते हैं,

पर बड़ों में भी कान से जुड़ी कई परेशानियां होती हैं, जो कि हल्के से लेकर गंभीर हो सकते हैं। इसके अलावा कान में संक्रमण के कई और कारण भी हैं, जिनमें शामिल हैं:-

  • जन्म दोष और चिकित्सा की स्थिति: – कई बार अंतर्निहित चिकित्सा स्थितियों जैसे कि प्रतिरक्षा की कमी या क्रानियोफेशियल विसंगतियों से भी कान के संक्रमण अधिक होते हैं, इसके अलावा कमजोर इम्यूनिटी वाले बच्चों में भी कान का संक्रमण अधिक होने का खतरा रहता है।
  • आयु: – 3 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में कान के संक्रमण की आशंका अधिक होती है।
  • पारिवारिक इतिहास: – जिन बच्चों के माता-पिता को बार-बार कान में संक्रमण होता है उनमें इसका खतरा अधिक होता है।
  • एलर्जी और जुकाम:- बहुत अधिक बार कान में संक्रमण होने से भी नाक में संक्रमण हो सकता है।

 

कान बहने के लक्षण – Symptoms of Ear Discharge in Hindi

ज्यादातर मामलों में कान बहना अचानक शुरू होता है। इससे पहले व्यक्ति को कुछ विशेष महसूस नहीं होता है लेकिन कान के बहने के लक्षणों को जानना जरूरी होता है। आइये जानते हैं कि कान बहने के लक्षण क्या हैं :

  • सुनने में अचानक कठिनाई का अनुभव होना।
  • व्यक्ति के कान में संक्रमण के कारण बुखार होना।
  • कान में सुन्नता या सनसनाहट होना।
  • कान में सूजन होना या कान लाल हो जाना।
  • दुर्गंध के साथ कान से तरल पदार्थ निकलना कान में दर्द होना।
  • कई बार ऐसे मामले में रोगी को सुनाई देना बंद भी हो जाती है।
  • कान से सफेद, हल्का पीला या भूरे रंग के पदार्थ को बाहर निकलना।

 

कान बहने के कारण – Ear discharge causes in hindi

जब भी आपकी कानों बाहरी कोई नुकीली वस्तु अंदर किसी कारणवश चली जाती है या फिर कान में किसी तरह का कीड़ा अंदर प्रवेश कर जाती है तब कान के पर्दे फट जाती है और तरल पदार्थ कान से डिस्चार्ज होने लग जाती है।

सर्दी, खिचखिच या गले में दिक्कत यदि एक हफ्ते से ज्यादा है तो कान को नुकसान हो सकता है। ऐसा नाक के पिछले व गले के ऊपरी भाग में मौजूद यूस्टेशियन ट्यूब में संक्रमण के कारण आई सूजन के बने रहने से पर्दे में छेद से होता है जिससे कान बहने लगता है।

20 प्रतिशत मामलों में सड़क हादसे या किसी अन्य तरह से कान पर या आसपास चोट लगने व अचानक तेज आवाज से सुनने में मददगार हड्डियों में चोट लग जाती है।

जिससे सुनाई देना कम हो जाता है व मवाद आने लगती है। इन सभी के अलावा kaan bahne ke karan नीचे दी गई है:

  • किसी भी प्रकार के बैक्टीरिया या फिर फंगल इन्फेक्शन कान में हो जाती है तब यह बहने लग जाती है।
  • यदि कोई व्यक्ति तैराक (swimmer) है तो उसे कान में खुजली (itching) और कान बहने की समस्या हो सकती है।
  • बाहरी कान में चोट लगने, फोड़ा-फुंसी होने या फफूंद लगने पर भी बहने की समस्या उत्पन्न हो जाती है।
  • वायु प्रदूषण, एलर्जी, गले में संक्रमण, चिकनफॉक्स, बुखार, कुपोषण या कई बार दांतों में इन्फेक्शन के कारण भी यह होने लग जाती है।
  • इसके अलावा कुछ लोग कान साफ करने के लिए कॉटन का प्रयोग करते हैं और जब कॉटन कान के अंदर छूट जाता है तो वहां घाव पैदा कर देता है जिसकी वजह से कान बहने लगता है।
  • कान का पर्दा आमतौर पर कान के अंदर अचानक चोट लगने या सिर पर अचानक प्रहार करने से फटता है जिसके कारण कान बहने लगता है।

 

कान बहने से बचाव – Prevention of Ear Discharge in Hindi

नीचे कुछ उपाय दी गई है, जिससे आपके अगर कान बह रही है तब आप इन सभी मुख्य बातों को अपनाकर इससे निजात पा सकते है और आप इस समस्या से बच सकते है:

  • ऐसे समय में आपको बीमार लोगों से दूर रहना चाहिए।
  • नहाने के बाद कान को अच्छी तरह से पोंछ लें या सुखा लें।
  • यदि आप किसी अत्यधिक शोर वाले जगह पर जाते हैं, तो कान को ढ़कने के लिए कुछ इस्तेमाल करें
  • यदि नहाते समय आप कान में कॉटन डालकर नहाते हैं तो नहाने के बाद कान से कॉटन निकाल लें अन्यथा यह कान के कैनाल (ear canal) में फंस जाता है जिसकी वजह से कान बहने लगता है।
  • धूम्रपान न करें, क्योंकि इससे कान में संक्रमण होता है और कान बहने की समस्या उत्पन्न हो सकती है।
  • कान को साफ करने के लिए माचिस की तीली, पिन या किसी अन्य चीज का इस्तेमाल न करें।
  • यदि कान में खुजलाहट महसूस हो दो उसे खरोंचने के लिए किसी तेज यंत्र का प्रयोग न करें अन्यथा कान का पर्दा (eardrum) फट सकता है।

 

कान बहने का उपचार Ear discharge treatment in Hindi

कान के बहने का उपचार इसके कारण पर निर्भर होता है यदि कान के परदे में छेद बड़े हो जाते हैं, तो उन्हें कान को पानी को दूर रखना चाहिए, पानी को कान से बाहर निकालने के लिए रुई पर पेट्रोलियम जेली लगाएं और कान में रख लें।

डॉक्टर भी आपके लिए सिलिकॉन के डाट बना सकते हैं और कान में लगा सकते हैं. ऐसे डाट को सही आकार और आकृति का बनाया जाता है ताकि वह कान में फंसे नहीं और आसानी से हटाया न जा सके।

 

कान बहने की अंग्रेजी दवा का नाम

हमने आपके लिए कान बहने की अंग्रेजी दवा का नाम DROP लेकर आए है, जिसमें आप अपने बीमारी के प्रकार के से इस्तेमाल में लाते है तब आप इससे निजात पा सकते है:

  1. Similasan kids ear relief drop: – यदि किसी बच्चे का कान बहने की समस्या हो गई, तब आप उसे दिन में 4 बार कान में रख सकते है। इसके अलावा अगर उसे कान में खुजली, जलन और कान में पानी जमने की समस्या हो गई तब इसे इस्तेमाल में ले सकते है जो जलन पैदा नही करती है।
  2. Wally’s natural ear oil: – यह एक नेचुरल चीजों से बनी ड्रॉप है जिसमें 6 कार्बनिक तत्व मौजूद रहती है। इसमें मौजूद मीठा बादाम, लहसुन, टी ट्री, नीलगिरी और इचीनेशिया जैसे हर्बल तत्व कान के सूजन को कम करके बहने की समस्या को जड़ से खतम कर देती है।
  3. Swim-ear drying ad: – अगर आपके कान में दर्द या सूजन हो रही है तब यह ड्रॉप जल्द निजात दिला देती है। इसमें 95% आइसोप्रोपिल अल्कोहल है जो दर्द को तुरंत खतम कर देती है। आपको बता दे इस ड्रॉप का उपयोग बच्चों के कान में इस्तेमाल नही करे।

 

कान बहने की होम्योपैथिक दवा

वैसे तो अंग्रेजी दवा होम्योपैथिक दवाओं को ही कहा जाता है जिसका कुछ बेहतरीन दवाओं का लिस्ट नीचे दी गई है, जिससे ऐसी समस्या को कम की जा सकती है:

  1. काली मूर: – यह कान बहाव रोकने के लिए के उत्तम दवा है जो जल्द से जल्द इसे ठीक कर देती है। काली मूर एक Eustachian दवा है जो कान की ट्यूब में हो रही सूजन को कम कर देती है और उसे जड़ से भी खतम कर देती है, जिससे कान बहना बंद हो जाती है।
  2. सिलिकिया: – अगर आपके कान में लंबे समय से यह समस्या हुई है तब आप इस दवा का प्रयोग अवश्य करें, क्योंकि जब कान बहने लगती है तब सूजन के कारण वहाँ की हड्डी फूलने लगती है, जिससे दर्द होने लग जाती है ऐसे मामलों में इस दवा का प्रयोग करें।
  3. मर्कसोल: – जब भी किसी को कान देती है तब फर्मासिस्ट उन्हे मर्कसोल ही अधिकतर मामलो में देते है, क्योंकि यह दर्द के साथ-साथ सूजन को कम करती है साथ ही कान में जितने तरह के समस्या हो रही है उन सभी को यह खतम कर देती है।

 

पतंजलि में कान बहने की दवा आयुर्वेदिक

योग गुरु रामदेव की पतंजलि कंपनी ने भी ऐसे कई तरह के ड्रॉप और टैबलेट मार्केट में लॉंच किए हुये है, जिससे आप इस समस्या को कम कर सकते है आप चाहते है कि kaan bahane ki dawa Patanjali का ही होना चाहिए तब आपको इनका प्रयोग करना चाहिए:

  1. Divya Sarivadi Vati: – सारिवादि वटी यह एक आयुर्वेदिक औषधि है, जो कान के रोग, श्वास फूलना, नपुंसकता, पुराना बुखार, मिर्गी, बवासीर में लाभकारी होती है। इस वटी का प्रयोग ज़्यादातर कान के रोगों में किया जाता है। कान के रोगों के लिए यह पतंजलि दवा बहुत ही लाभकारी है।
  2. Baidyanath Bilva Oil (25ml) 2X: – यह दवा कान के दर्द को ठीक करने के साथ साथ इंफेक्शन और सुनने के समस्या को भी ठीक करता है।
  3. Sri Nanak Pharmacy Kanmula Ear Drops: – यह दवा कान के कई रोग ठीक करती है,जैसे कान की सूजन, चोट, खुजली, दर्द आदि।
  4. Paavani Ayurvedik ear oil: – यह एक 100% कार्बनिक ऑयल है जो कान दर्द और खुजली की समस्या से छुटकारा दिलाता है। कानों की बेहतर स्वस्थ्य के लिए यह ड्रॉप का इस्तेमाल किया जा सकता है जो इसमें नमी देकर आराम पहुंचाती है।

 

कान बहने की दवा घरेलू उपचार

बंद कान और कान के वैक्स को बढ़ने से रोकने के लिए आप घर पर भाप ले सकते हैं। घर में स्टीम ट्रीटमेंट के लिए, सबसे पहले एक कटोरे में गर्म पानी लें और फिर उसमें तौलिय को डुबोएं। अब तौलिए को सिर पर बाँध लें। इससे कानों तक गीली तौलिए का प्रभाव पहुंचेगा।

भाप टाशियन ट्यूब (कान के मध्य क्षेत्र का महत्वपूर्ण भाग) को खोलने में मदद करेगी। इस तरह कान का तरल पदार्थ निकलने लगेगा। इसके अलावा आप एक कटोरे में गर्म पानी भी भर सकते हैं। फिर सिर को तौलिए से ढ़क लें। इस बात का ध्यान रखें कि कान में भाप जा रही हो।

नीम के तेल में एंटी−बैक्टीरियल, एंटी वायरल और एंटी−फंगल प्रॉपर्टीज होती हैं। यह प्रापर्टीज कानों में होने वाले इंफेक्शन व दर्द को दूर करने में सहायक है।

इसके इस्तेमाल के लिए नीम के तेल की कुछ बूंदे प्रभावित कान में डालें। अब अपने कान को रूई की मदद से कवर करें और कुछ देर के लिए ऐसे ही रहें। इसके बाद आप रूई को कान से निकाल सकते हैं।

 

कान में इन्फेक्शन की दवा

अगर आपके कान में किसी भी तरह के इन्फेक्शन हो गई है तब आप नीचे दिया गया ड्रॉप और दवाओं का प्रयोग डॉक्टर के कहने के बाद कर सकते है:

  • Baidyanath Bilva Taila
  • Allen otovin Ear Drops
  • Baidyanath Kshar Tel
  • Ear Liege – Ayurvedic Ear
  • Sri Nanak Pharmacy Kanmula Ear Drops Ayurvedic

 

Otorex Ear Drop :-  यदि किसी का कान बहकर जाम हो गया है तो डॉक्टर उन्हें यह ड्राप इस्तिमाल करने का सुझाव देते है ताकि उनके कान में जमा हूआ मल साफ हो जाये | यह काफी अच्छा ड्राप है जिसे दिन में 4 से 5 बार इस्तिमाल करना चाहिए

 

अंतिम चरण – बहते कान का आपरेशन करना जरूरी है

जी हाँ यदि आप के बहते कान को रोकने के लिए डॉक्टर के सलाह से सभी प्रकार के इलाज किये और फिर भी कान का बहना बंद नहीं हो रहा है तो ऑपरेशन सब से अंतिम चरना होता है जो काफी सुरक्षित रहता है

कही लोग ऑपरेशन के नाम से डर ते है लेकिन डरने की जरूरत नहीं होती है क्यों की यह यह काफी आम बीमारी है इसीलिए इसका इलाज भी डॉक्टर के लिए आम होता है | और समय होते ही ऑपरेशन करना जरूरी है वरना भविष्य में काफी परेशानी हो सकती है

हमारे कान का भी ऑपरेशन हो चूका है इसीलिए हम इस बीमारी के बारे में सही तरह से सलाह और सुझाव दे सकते है | आप को अपने डॉक्टर पर भरोसा रखना चाहिए और समय होते ही इस बीमारी का इलाज कर लेना चाहिए

 

FAQ’s – Ear Discharge in Hindi

Q. कान बहे तो क्या करे
अगर आपका कान बह रही है तो सबसे पहले आपको उसमें रुई लगा लेना चाहिए, जिससे आप अन्य इन्फेक्शन से बच सकते है साथ ही ऊपर में बताई गई ड्रॉप का इस्तेमाल कर सकते है जिसमें मर्कसोल सबसे प्रमुख है।

Q. बच्चे का कान बहने की दवा
कान अक्सर बच्चे का ही बहने लगती है, अगर आपके भी बच्चे का यह समस्या हो रही है तब आप उसे Similasan kids ear relief drop उसके कान में दिन भर में 4 बार दे, जिससे उसे आराम मिलना जल्द शुरू हो सकती है।

Q. कान की गंदगी कैसे साफ करें
कान की सफाई रखना बहुत ही जरूरी होता है, कान की गन्दगी को साफ करने का यह सबसे सबसे आसान तरीका है। इसके लिए आप कान में एक या दो बूंद सरसों का तेल डालकर सिर को उसी दिशा में मोड़कर रखें और या तीह लेट जाए, ऐसा पांच मिनट तक इसी अवस्था में रहने से कान की गन्दगी मुलायम हो जाती है और आराम से बाहर निकल जाती है।

Q. कान में सूजन क्यों आता है
यह तब होता है, नाक और गले का संक्रमण कान में पहुंच जाता है। यह जुकाम रहने पर नाक से कान तक जाने वाली यूस्टेशियन ट्यूब काम करना करना बंद कर देती है, जिससे करना पर्दे के पीछे दबाव असामान्य हो जाता है। जिससे कान में सूजन हो जाती है।

Q. कान बहना बंद कैसे करें
एक चम्मच सहद के अंदर एक चम्मच नीम का तेल मिलाकर 2 – 2 बूंद कानो में दिन में दो बार डाले मात्र कुछ ही दिनों में कानो का बहना ठीक हो जायेगा। इसके अलावा रोज सुबह श्याम खली पेट 1 गिलास पानी के अंदर 1 या 2 निम्बू कटकर डाले और दिन में दो बार उस पानी का सेवन करे 1 हफ्ते के अंदर – अंदर कानो का बहना बंद हो जायेगा।

Q. कान से पस क्यों निकलता है
जब आपका कान प्रदूषण, इन्फेक्शन, अंदरूनी परेशानी, ट्यूमर या चोट से ग्रसित हो जाती है तब वहाँ पर सूजन सोने लगती है और कान की हड्डी तेजी से सड़ने लग जाती है, जिसके फलस्वरूप कान से सफ़ेद पदार्थ का रिसाव होने लग जाती है जो पस कहलाती है।

 

Disclaimer

इस लेख में दी गई जानकारी विभिन्न विशेषज्ञों के अध्ययन और राय के साथ-साथ आम आदमी के स्वास्थ्य पर आधारित है। इस जानकारी को देने का उद्देश्य विषय से परिचित होना है। पाठकों को अपने स्वास्थ्य के आधार पर कोई भी निर्णय लेने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।

 

Conclusion

इस लेख में आपने कान बहना – Ear discharge in hindi के बारें में जाना। आशा करते है आप आपको कान बहने की अंग्रेजी दवा का नाम , पतंजलि  और एलोपैथिक दवा की पूरी जानकारी जान चुके होंगे।

आपको लगता है कि इसे दूसरे के साथ भी शेयर करना चाहिए तो इसे Social Media पर सबके साथ इसे Share अवश्य करें। शुरू से अंत तक इस Article को Read करने के लिए आप सभी का तहेदिल से शुक्रिया…

 

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