पीलिया कितने पॉइंट होना चाहिए – Piliya kitne point hona chahiye

पीलिया कितने पॉइंट होना चाहिए – आज के इस दौर में बीमारियों ने मानव शरीर को अपना घर बना रखा है, जो कि मनुष्य की खुद की लापरवाही और उसके बुरे कामों का नतीजा है अनेक प्रकार की वस्तुएं जो कि देखने में तो स्वादिष्ट लगती हैं परंतु वो हमारे शरीर को बहुत हानि पहुंचाती हैं जैसे जंक फूड आदि

जो मनुष्य अपने आहार में आवश्यक पोषक तत्वों जैसे प्रोटीन, विटामिंस आदि का सेवन करता है उसे कभी भी किसी रोग का सामना नहीं करना पड़ता है तथा वो सदैव स्वस्थ रहता है

हमे बीमारियां तब होती है जब हमारे शरीर को संतुलित आहार पर्याप्त मात्रा में नही मिल पाते, एक संतुलित आहार उसे कहते हैं जिसमें प्रोटीन, विटामिन, कार्बोहाइड्रेट, वसा खनिज लवण आदि पर्याप्त मात्रा में मौजूद हों

अपने आहार के साथ साथ हमे अपने आस पास के पर्यावरण का भी ध्यान रखना होगा, क्योंकि प्रदूषण भी अनेक बीमारियों का कारण बनता है जैसे त्वचा और आंखों से संबंधी रोग आदि

आज के इस टॉपिक में हम पीलिया (Jaundice) रोग के बारे में सारी जानकारियां प्राप्त करेंगे, आगे हम पीलिया का परिचय, उसके प्रकार, पीलिया के लक्षण, कारण और उसके रोकथाम और उपचार के बारे में पढ़ेंगे

 

Peeliya kitne point hona chahiye
Piliya (Jaundice) kitne point hona chahiye

 

 

अनुक्रम

पीलिया कितने पॉइंट होना चाहिए | Piliya (Jaundice) kitne point hona chahiye

मानव शरीर में पीलिया बिलीरुबिन की मात्रा बढ़ने के कारण होता है, बिलीरुबिन हमारे शरीर में लीवर से उत्पन्न गंदगी को साफ करता है

सामान्यतः इस बिलीरुबिन का स्तर 1 प्रतिशत या इससे कम ही होता है परंतु जब इसकी मात्रा 2.5 प्रतिशत से बढ़कर और अधिक हो जाती है तो पीलिया के लक्षण प्रकट होने लगते हैं और मनुष्य पीलिया रोग से ग्रस्त हो जाता है

यह रोग छोटे बच्चों से लेकर वृद्ध लोगों तक में भी हो सकता है तो जैसा कि हमारा सवाल है कि पीलिया कितने पॉइंट होना चाहिएतो आपके शरीर में बिलीरुबिन की मात्रा 2 प्रतिशत से कम ही होनी चाहिए


पीलिया का परिचय | Piliyaka parichay

पीलिया एक ऐसी बीमारी है जो हमारे शरीर में बिलीरुबिन की मात्रा अधिक होने पर होती है इसका निर्माण हमारे शरीर के ब्लड और ऊतकों में होता है, जब लाल रक्त कोशिकाएं किन्ही कारणों से टूट जाती हैं तो उनसे पीले रंग के बिलीरुबिन का निर्माण होता है

शरीर में बिलीरुबिन का स्तर बढ़ जाने के कारण बहुत सी बीमारियां जैसे त्वचा नाखून और आंखों का सफेद भाग पीला नजर आने लगना आदि शामिल हैं, इसी को पीलिया कहते हैं पीलिया एक सामान्य सा दिखने वाला रोग है पर इसका परिणाम मनुष्य के शरीर पर बहुत गंभीर होता है


पीलिया के प्रकार | Piliya ke prakar

पीलिया मुख्यतः तीन प्रकार के होते हैं

 

1) हेपेटोसेल्यूलर पीलिया | Hepatocellular piliya

यह पीलिया का एक प्रकार है जो तब होता है जब लीवर को किसी कारण से नुकसान पहुंचता है यह नुकसान कई कारणों से हो सकता है

हेपेटोसेल्यूलर पीलिया अन्य बीमारियों जैसे हेपेटाइटिस आदि के कारण भी हो सकता है जिसमें इस वायरस से सबसे अधिक संक्रमित मनुष्य का यकृत होता है

जो लोग शराब का बहुत अधिक सेवन करते हैं उनमें यह रोग होने की संभावना सबसे अधिक होती है

 

2) हेमोलिटिक पीलिया | Hemolytic piliya

हेमोलिटिक पीलिया एक प्रकार का पीलिया है जो तब होता है जब रक्त प्रवाह में लाल रक्त कणिकाएं सामान्य गति से टूटने की अपेक्षा अधिक तेज गति से टूटने लगती है

लीवर के सिस्टम में बिलीरुबिन की मात्रा ज्यादा होने के कारण लीवर को कार्य जारी रखने में समस्या होने लगती है इस स्थिति को हेमोलिसिस भी कहा जाता है

यह एक बहुत ही गंभीर स्थिति है जो मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए आगे चल कर अन्यंत घातक साबित हो सकती है हेमॉलिटिक पीलिया सबसे अधिक मलेरिया से पीड़ित रोगियों में देखने को मिलता है

 

3) अवरोधक पीलिया | Obstructive piliya

यह भी पीलिया का ही एक प्रकार है यह पित्त नलिकाओं के बीच बनने वाले ब्लाक के कारण होता है जो कि लीवर, गाल ब्लैडर और आंत को जोड़ती है सूजी हुई लसिका ग्रंथियों के कारण भी अवरोधक पीलिया हो सकता है

वर्तमान में पीलिया के अन्य कई प्रकारों का भी जिक्र किया गया है जिनके नाम निम्न हैं

  1. हैपेटाइटिस-ए- Hepatitis A
  2. हैपेटाइटिस-बी- Hepatitis B
  3. हैपेटाइटिस-सी- Hepatitis C
  4. हैपेटाइटिस-डी- Hepatitis D
  5. हैपेटाइटिस-ई- Hepatitis E
  6. हैपेटाइटिस-एफ- Hepatitis F
  7. हैपेटाइटिस-जी- Hepatitis G

 

हेपेटाइटिस-ए और हेपेटाइटिस-ई वायरस दूषित खान-पान द्वारा फैलता है जबकि अन्य रोग ब्लड ट्रांसफ्यूजन आदि द्वारा फैलते हैं


पीलिया को इंग्लिश में क्या कहते हैं | Piliya ko English me kya kahte hain

पीलिया को इंग्लिश में जॉन्डिस (jaundice) कहते हैं

जो हमारे शरीर में बिलिरुबिन की मात्रा अधिक होने के कारण होता है यदि इस रोग से पीड़ित मरीज का जल्दी ही इलाज नही हो पाता है तो उसकी स्थिति बहुत ही गंभीर हो सकती है

यह रोग दिखने में तो सामान्य दिखता है परंतु इसका रोगी के शरीर पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है जो कि आपको आगे पीलिया के लक्षणों में देखने मिल जाएगा


पीलिया के लक्षण | Piliya ke lakshan

पीलिया में सबसे पहले त्वचा और आंखों में पीलापन आ जाता है इसके अलावा पीलिया के और भी लक्षण निम्न दिए गए हैं जिससे आप आसानी से पीलिया रोग का पता कर सकते हैं

  • वजन कम होना
  • बुखार आना
  • ठंड लगना
  • कमजोरी होना
  • सिर में दर्द होना
  • भूख न लगना
  • अधिक थकान होना
  • शरीर में जलन
  • चिकनाई वाले भोजन से अरुचि
  • पेशाब का रंग गहरा पीला होना
  • पेट में दर्द
  • कुछ मामलों में खुजली और उल्टी भी होना
  • कब्ज की शिकायत होना
  • नींद की समस्या होना

यदि आपको ये सभी लक्षण किसी में दिखते हैं तो उसको तुरंत डॉक्टर के पास जाने की सलाह दें क्योंकि अधिक समय तक इलाज न करने पर आपको अधिक कमजोरी आ सकती है तथा स्थिति और भी गंभीर हो सकती है

डॉक्टर लक्षणों को देखकर, कुछ जांच करके, रोग की पुष्टि करके, उचित समय पर रोगी को इलाज प्रदान कर सकते हैं जिससे पीलिया से बचाव किया जा सकता है


पीलिया किन लोगों को हो सकता है | Peeliya kin logon ko ho sakta hai

पीलिया रोग किसी भी इंसान में देखने को मिल सकता है, फिर चाहे वो बच्चे हों या फिर कोई बूढ़ा इंसान कुछ मामलों में पीलिया नवजात शिशुओं को होता है परंतु पीलिया के काफी मामले बड़ों में भी देखने को मिलते हैं

यदि समय पर पीलिया का इलाज न कराया जाए तो सेप्सिस भी हो सकता है और कुछ मामलों में लीवर पर भी बुरा असर पड़ सकता है इसलिए समय पर इसका इलाज कराना जरूरी है


पीलिया होने का कारण | Piliya hone ka karan

बिलीरुबिन का काम हमारे शरीर में लीवर से गंदगी को साफ करना होता है लेकिन जब कई कारणों से इसकी मात्रा अधिक हो जाती है तो यह काम करना बंद कर देता है जिससे पीलिया की समस्या पैदा हो जाती है

लाल रक्त कोशिकाओं के टूटने के कारण ही बिलीरुबिन की मात्रा में वृद्धि हो जाती है जिसकी वजह से पेटिक पीलिया होता है इसके अन्य भी कारण हो सकते हैं जिनमें जो मुख्य रुप से शामिल हैं वो नीचे दिए गए हैं

  • थैलासीमिया
  • मलेरिया
  • सिकल सेल रोग
  • गिलबर्ट सिंड्रोम
  • तथा अन्य अनुवांशिक कारण

जब लीवर में किसी तरह का संक्रमण हो जाता है या कोशिकाओं को नुकसान पहुंचने लगता है तो हेपैटोसेल्यूलर पीलिया हो जाता है

यह मुख्य तौर पर शराब का अधिक सेवन करने अधिक ताली और मसालेदार चीजों का सेवन करने और शरीर में अधिक कब्ज होने के कारण होता है

पित्त की नलीका में रुकावट, लीवर में घाव, पित्त की पथरी, हेपेटाइटिस या किसी दवा के साइड इफेक्ट के कारण भी पीलिया रोग हो सकता है दूषित पानी, खराब खान पान की चीजों आदि का सेवन करने से भी पीलिया रोग फैल सकता है


पीलिया में किन चीजों का सेवन करना चाहिए | Piliya me kin cheejon ka sevan karna chahiye

 

1) फलों के जूस का प्रयोग करें | Falon ke jus ka prayog karen

फलों के जूस का प्रयोग हर किसी के स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है फिर चाहे वो कोई स्वस्थ इंसान हो या कोई रोगी व्यक्ति, बीमारी में डॉक्टर्स रोगी को फलों का सेवन करने की सलाह देते हैं जिससे उनके स्वास्थ्य में सुधार हो सके

2) अधिक से अधिक पानी पिएं | Adhik se adhik paani piyen

अधिक पानी पीने से आप कई बीमारियों से दूर रह सकते हैं पानी हमारे शरीर के लिए एक आवश्यक तत्व है मानव शरीर में लगभग 70 प्रतिशत जल पाया जाता है इसलिए डॉक्टर भी मरीजों को अधिक से अधिक पानी पीने की सलाह देते हैं

3) खाने से पहले अच्छी तरह से हाथों को धोएं | khane se pahle achhi tarah se haathon ko dhoyen

आपके हाथों के माध्यम से आपके शरीर में कई वायरस जा सकते हैं जिससे अनेकों प्रकार की बीमारियां फैल सकती हैं इसलिए कभी भी कुछ खाने से पहले हाथों को अच्छी तरह से अवश्य धोएं

4) ताजा और शुद्ध भोजन करें | Taza aur shuddh bhojan kare

ताजा और शुद्ध भोजन सदैव हमारे शरीर के लिए फायदेमंद साबित होता है ताजा भोजन खाने से हम स्वस्थ रह सकते हैं और पीलिया के मरीजों को तो साफ सफाई और भोजन का खास ध्यान देना चाहिए


पीलिया में उपयोग की जाने वाली अन्य चीजें | Piliya me upyog ki jane wali anya cheejen

पीलिया के रोगी अपने डाइट में निम्न दी गई अन्य चीजों का भी उपयोग कर सकते हैं

  • दही
  • प्याज
  • मूली
  • पपीता
  • टमाटर
  • तुलसी
  • नारियल पानी
  • मट्ठा
  • गिलोय और शहद
  • धनिया का बीज

पीलिया में किन चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए | Piliya me kin cheejon ka sevan nahi karna chahiye

  • बाहर का खाना बिल्कुल न खाएं
  • मक्खन से परहेज़ करें
  • तली हुई चीजों से परहेज़ करें
  • ज्यादा तीखा न खाएं
  • अंडा, मीट, चिकन एवं मछली का सेवन न करें
  • चाय और कॉफी से भी परहेज करें

यदि आप पीलिया रोग से ग्रस्त हैं और चाहते हैं कि जल्द से जल्द ठीक हो जाएं तो आपको डॉक्टर द्वारा दी गई दवाइयों के साथ साथ अपनी डाइट का भी अच्छे से ध्यान देना होगा जिससे आपकी सेहत में जल्द से जल्द सुधार आए


पीलिया का उपचार | Piliya ka upchar

पीलिया रोग का उपचार करने के लिए सबसे पहले डॉक्टर्स कुछ जांच करते हैं, जांच में पीलिया का पता लगने पर, रोगी की हालत को देखते हुए ही डॉक्टर उनको दवाइयां देते हैं तथा रोगी की डाइट में बदलाव करते हैं

कुछ मरीजों में पीलिया अधिक होता है तो उन्हें डॉक्टर हॉस्पिटल में ही एडमिट होने की सलाह देते हैं जिससे उनका पूरा तरह ध्यान रखा जा सके, परंतु जिन लोगों में पीलिया का स्तर कुछ काम होता है उन्हे डॉक्टर दवा देते हैं तथा टाइम पर दवा लेने की, और डाइट प्लान बदलने की सलाह देते हैं


पीलिया की रोकथाम | Piliya ki roktham

यदि हम कुछ सावधानियां बरतें तो पीलिया रोग से बचा जा सकता है डॉक्टर्स का कहना है कि पीलिया से बचाव के लिए लीवर का स्वस्थ होना बहुत जरूरी है क्योंकि यही बाइल जूस का उत्पादन करता है जो हमारे भोजन को पचाने में मदद करता है

 

निम्न दिए गए बातों का पालन करके आप अपने लीवर को स्वस्थ रख सकते हैं जो कि पीलिया की रोकथाम में आपकी मदद करेगा

1) व्यायाम | Vyayam

रोजाना सुबह और शाम व्यायाम करके आप अपने शरीर को स्वस्थ रख सकते हैं यदि आपका शरीर स्वस्थ रहेगा तो बीमारियां आपसे कोसों दूर रहेंगी तो यदि आप चाहते हैं कि आपका जीवन रोगमुक्त रहे तो आपको प्रतिदिन व्यायाम अवश्य करना चाहिए

2) डाइट | Diet

यदि आपकी डाइट सही रहेगी रहेगी तो आपको कोई भी बीमारी नहीं होगी क्योंकि एक संतुलित डाइट ही हमारे लीवर को स्वस्थ रखता है, अपनी डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियां एवं फल अवश्य शामिल करें

3) शराब का सेवन | Sharab ka sevan

शराब का सेवन करने वाले लोगों को अनेकों बीमारियां हो सकती हैं जैसे लंग कैंसर, पीलिया आदि, शराब का अधिक सेवन भी पीलिया को जन्म देता है क्योंकि शराब का सबसे अधिक बुरा प्रभाव हमारे लीवर पर ही पड़ता है

4) स्वच्छता | swachhata

अपने दैनिक जीवन में साफ सफाई का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है साफ पानी पिएं, साफ फलों और सब्जियों का ही सेवन करें , स्वच्छता से अनेक बीमारियों को दूर रखा जा सकता है


पीलिया होने पर ध्यान रखने योग्य बातें | Piliya hone par dhyan rakhne yogya baatein

  • डॉक्टर की सलाह लेकर अपने भोजन में प्रोटीन और कार्बोज वाली चीजों का ही सेवन करें
  • अपने आस पास और अपनी स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें
  • शुद्ध गर्म और ताजा भोजन का प्रयोग तथा उबले पानी का सेवन करना अधिक फायदेमंद रहता है
  • रोगी का खास ख्याल रखें उसे ज्यादा काम न करने दें यदि हो सके तो उसे ज्यादा से ज्यादा आराम करने को कहें
  • नींबू, संतरे तथा अन्य फलों का सेवन रोगी के लिए ज्यादा लाभकारी होता है
  • रोगी की लगातार जांच कराते रहना चाहिए

FAQs – पीलिया (Jaundice) कितने पॉइंट होना चाहिए

सवाल :पीलिया में क्या परहेज़ करना चाहिए?

पीलिया में तेल और मसालेदार चीजों से परहेज़ करना चाहिए

सवाल : पीलिया रोग क्यों होता है?

पीलिया रोग हमारे शरीर में बिलीरुबिन की मात्रा बढ़ने से होता है

सवाल : पीलिया को इंग्लिश में क्या कहते हैं?

पीलिया को इंग्लिश में जौंडिस (jaundice) कहते हैं

सवाल : हमारे शरीर मेंपीलिया कितने पॉइंट होना चाहिए?

हमारे शरीर में पीलिया 2 प्वाइंट से कम होना चाहिए

सवाल : पीलिया का एक लक्षण बताइए?

पीलिया के लक्षणों में सबसे कॉमन लक्षण त्वचा और आंखों में पीलापन आदि है

 

Conclusion

आज का हमारा आर्टिकल पीलिया से संबंधित था, आज हमने पीलिया का परिचय, मानव शरीर में पीलिया कितने पॉइंट होना चाहिए, उसके प्रकार, लक्षण, डाइट तथा उसके उपचार एवं रोकथाम से जुड़ी बातों के बारे में जानकारियां प्राप्त की है

हम आशा करते है कि आपको आज का ये आर्टिकल पसंद आया होगा, अगर आपका कोई भी सुझाव हो तो आप comment box में अपना सुझाव लिख सकते हैं और आप अपने दोस्तों के साथ शेयर भी कर सकते हैं

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