Postmortem kaise Hota Hai – पोस्टमार्टम क्या होता है

Postmortem kaise hota hai – मृत शरीर का परीक्षण करने के लिए पोस्टमार्टम किया जाता है जो एक सर्जिकल प्रक्रिया है।

जिसमें पैथोलोजिस्ट द्वारा डेड बॉडी की पूरी तरह से जाँच की जाती है, यह जाँच करने की नौबत तब आती है जब मृत व्यक्ति की मौत का कारण नही पता होता है।

जब पोस्टमार्टम की जाती है तब उस व्यक्ति के मौत के कारण, तरीका, समय के बारें में पता लगाई जाती है।

जिसके आधार पर अपराधी की भी पहचान करना मुमकिन हो पाता है। इस तरह हम कह सकते है कि किसी भी व्यक्ति की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए उसके शव का postmortem किया जाता है।

हालाँकि की सभी मृत शरीर का पोस्टमार्टम नही किया जाता है, जब भी किसी किसी व्यक्ति की मौत संदिग्ध हालत में होती है, तब उनके परिजन और पुलिस इस तरह के सर्जिकल प्रोसेस को अपनाते है,

जिसके बाद काफी हद तक उनकी मौत का कारण, वजह, समय.आदि पता चल जाती है, जिसके आधार पर अपराधी को पुलिस द्वारा पकड़ा जाता है।

ऐसा कहा जाता है कि दुनिया में जिसने भी जन्म लिया है, उसकी मौत निश्चित है। किसी की मौत प्राकृतिक कारणों से होती है तो कई बार दुर्घटना या अप्राकृतिक कारणों से भी लोगों की असमय मौत हो जाती है। ऐसे मामलों में डेड बॉडी का पोस्टमॉर्टम कर ये पता लगाया जाता है

कि मौत की वजह क्या थी, साथ ही पोस्टमॉर्टम के जरिए मौत का समय भी पता किया जा सकता है। जिसमें शव को चीरकर उसकी एक-एक अंगों की जाँच की जाती है।

जब यह प्रक्रिया पूर्ण होती है तब इसे हम पोस्टमार्टम को ऑटोप्सी (Autopsy)और शवपरीक्षा भी कहते है।

हमारें आस-पास ऐसी कई घटनाएँ होती रहती है जो हमारे मन में कई सवाल भी लाती रहती है उसी में से एक सवाल इंटरनेट पर सर्च किया जाता है कि – Postmortem kaise hota hai

पोस्टमार्टम क्या होता है ? यदि आप भीइस विषय के बारे में विस्तार में जानकारी प्राप्त करना चाहते है तब आपको इस लेख में पोस्टमार्टम क्यों किया जाता है के बारें में जान सकते है।

 

Postmortem kaise Hota Hai
Postmortem kaise Hota Hai

 

Postmortem क्या होता है – Postmortem kaise hota hai

पोस्टमार्टम का मतलब क्या होता है पोस्ट मार्टम फ्रेन्च भाषा का मुहावरा है। जिसमें पोस्ट का अर्थ बाद में और मार्टम का अर्थ होता  है मृत्यु के बाद जिसका शाब्दिक अर्थ है मृत्यु के बाद या मृत्यु के पश्‍चातहोता है। जो एक प्रकार का शल्य प्रक्रिया (सर्जिकल प्रोसेस) होता  है।

जिसमें शव का परीक्षण शरीर के बाहर और भीतर किया जाता है, जिससे यह पता लगाया  जाता  है कि इस व्यक्ति की मृत्यु किस कारण से और किस तरीके से हुई है।

शवपरीक्षा एक विशिष्ट चिकित्सक द्वारा की जाती है जिसे विकृतिविज्ञानी (पैथोलोजिस्ट) कहते हैं।

पोस्टमार्टम को Autopsy या post-mortem examination भी कहा जाता है। मेडिकल फील्ड में एक बहुत ही जरुरी शारीरिक जांच होती है जो तब किया  जाता है जब किसी व्यक्ति की मौत संदेहजनक स्थिति में हो जाती है।

उस व्यक्ति के परिजन और पुलिस इस गुत्थी को सुलझाने के लिए Autopsy करवाते है।

जिस तरह मनुष्य की आकस्मिक मौत हो जाने पर उनके शरीर का पोस्टमार्टम किया  जाता है तो वही कानूनन किसी जानवर को इस तरह के मौत जिसमें हत्या का आकांशा है तब उसके शरीर का एंटीमार्टम किया जाता है।

मृत्यु के बाद जब शव का परीक्षण किया जाता है तो उसे पोस्टमार्टम एग्जामिनेशन कहा जाता है और इस परीक्षण के रिपोर्ट को पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट। मनुष्यों में एंटीमार्टम का जिक्र पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आता है और इसके बहुत सी कानूनी क़ायदे  होते हैं।

पोस्ट मार्टम के दौरान चिकित्सक यह देखते हैं कि जो जख्म हैं यह मौत के पहले के हैं या बाद के है  और उसे अपनी रिपोर्ट में लिखते हैं।

इसका उदेश्य मृत्यु का कारण, मृत्यु का तरीका, मृत्यु से पहले व्यक्ति के स्वास्थ्य की स्थिति और मृत्यु से पहले कोई चिकित्सा निदान और उपचार उचित था या नहीं, यह निर्धारित करना है।

 

Postmortem का इतिहास

शव परीक्षण की शुरुआत शरीर रचना विज्ञान से हुई थी, इसलिए शव परीक्षा का प्रारंभिक इतिहास physical dissection से संबंधित है। इसकी शुरुआत बेबीलोन (हिल्ला-इराक) में लगभग 3500 ईसा पूर्व में किया गया था।

इस अवधि मे, दिव्य आत्मा से संदेश प्राप्त करने के लिए जानवरों के अंगों की जांच की जाती थी। 3 हेपेटोस्कोपी या हार्स्पिसी की एक अन्य प्रथा भी प्राचीन समय में प्रचलित थी।

इस अभ्यास में भविष्य की भविष्यवाणी के लिए बलि किए गए जानवरों के जिगर और आंत की जांच की जाती थी।

मिस्र में लगभग 3000 ईसा पूर्व, ममीकरण की एक तकनीक का अभ्यास किया गया था, जहां प्राचीन मिस्र के एम्बल्मर बाएं हाइपोकॉन्ड्रिअम पर चीरा लगाते थे और इस चीरे के माध्यम से आंत, पेट, यकृत, प्लीहा, अग्न्याशय, गुर्दे और फेफड़े को हटा दिया जाता था।

मस्तिष्क को नासिका छिद्रों से निकाला जाता था, लेकिन हृदय शरीर में ही रहता था।

इस अभ्यास में भले ही अंगों को हटा दिया गया था, उनका अवलोकन कभी नहीं किया गया था और यह विच्छेदन किसी भी रोग प्रक्रिया की पहचान या समझ के लिए संबंधित नहीं था।

हालांकि, जैसे-जैसे समय बीतता गया हेपेटोस्कोपी या हार्स्पिसी और इमबलिंग की तकनीकों ने एक प्रमुख भूमिका निभाई। जिससे शव परीक्षण में प्रगति आने लगी थी। मिस्र के लोग अपने यहाँ के बड़े दरबारो राजाओं का पुतला बनाने के लिए उनके शरीर का पोस्टमार्टम किया करते थे।

जिसे ममीफिकेशन भी कहा जाता है। जिसमें शरीर के सभी अंग बाहर निकालकर उसमें नमक भर दिया जाता था और उसे धागे की मदद से सील दिया जाता था।

ऐसा करने से वह मृत शरीर लंबे समय तक सुरक्षित रहती थी। जिसके बाद उसे यहाँ पाई बनाई गई पिरामिड में दफन कर दिया जाता था।

 

Postmortem कितने प्रकार का होता है?

पोस्टमार्टम परीक्षा, जिसे शव परीक्षण भी कहा जाता है, मृत्यु के बाद शरीर की परीक्षा है। पोस्टमार्टम का उद्देश्य मौत के कारणों का पता लगाना है।

वैसे तो ऑटोप्सी को तीन प्रकार में विभाजित की गई है, लेकिन नई तकनीक के आने के बाद इसे 4 तरीकों से परीक्षण पूर्ण की जाती है।

 

Clinical or pathological autopsies

ऑटोप्सी के इस प्रकार को करने का मुख्य उदेश्य मृत व्यक्ति के शरीर में मौजूद बीमारी के पता लगाना होती है, यानि क्लिनिकल या पैथोलॉजिकल ऑटोप्सी किसी विशेष बीमारी के निदान के लिए या अनुसंधान उद्देश्यों के लिए इस तरह का इगजामिन करती है।

ऐसे मृत शव का पोस्टमार्टम उस स्थिति में की जाती है, जब व्यक्ति की मौत एक अलग किस्म के बीमारी से हुई हो। तब साइंटिस्ट और विशेषज्ञों उसके डेड बॉडी पर रिसर्च करते है और वह उन रोग प्रक्रियाओं पर प्रकाश डालते है जो व्यक्ति के मृत्यु की ओर ले गई हो।

अस्पतालों में कभी-कभी ऐसे भी व्यक्ति की मौत हो जाती है जिसके परिजन के बारें में किसी को कुछ भी पता नही होती है ऐसे में उसके शरीर को परीक्षण के रूप में प्रयोग में लाई जाती है, जिसे पैथोलोजिस्ट की देख-रेख में नयें पैथोलोजिस्ट बनने की चाह रखने वालें व्यक्ति को इसका विश्लेषण बताई जाती है।

  • मृत्यु का कारण बनने वाली बीमारी पता लगाने के लिए
  • जीवित अवस्था में किया गया उपचार की प्रभाव का मूल्यांकन करने के लिए
  • मेडिकल छात्रों और डॉक्टरों को शिक्षित करने और चिकित्सा अनुसंधान उद्देश्यों के लिए
  • Organs & tissues transplantation उदेश्य के लिए

 

Medico-legal or forensic or coroner’s autopsies

इस तरह के परीक्षण के जरिये शव की पहचान की जाती है, उसके मृत्यु का कारण, मृत्यु का समय और मृत्यु का परिस्थिति इत्यादि

जैसे सवालों के बारें में पता लगाने के लिए शव का इगजामिन की जाती है। कभी ऐसा भी होती है कि मृत व्यक्ति के परिजन के बारें में पुलिस को पता नही होती है,

तब वह उसके DNA test (Deoxyribonucleic acid) करने का आदेश जिला अस्पताल को देती है,

जिससे उस व्यक्ति के बारें में अधिक जानकारी प्राप्त की जा सकें। इस पोस्टमार्टम के तहत फिजिकल एग्जामिनेशन के साथ ब्लड टेस्टिंग भी की जाती है।

सैंपल्स के लिए ब्लड सैंपल और Stomach liquid content का सैंपल लिया जाता है। इस तरह के परीक्षण करने से पहले डॉक्टर को पुलिस की पर्मिशन लेनी होती है जो पुलिस सर्जन के देख-रेख में होती है।

  • मौत का कारण निर्धारित करने के लिए
  • मृत्यु के तरीके को निर्धारित करने के लिए
  • मृत्यु के बाद के समय का अनुमान लगाने के लिए
  • अज्ञात होने पर मृतक की पहचान स्थापित करने के लिए
  • चोटों का डॉकयुमेंट तैयार करने और यह पता लगाने के लिए कि चोट कैसे लगी है
  • मौत का कारण बनने वाली वस्तु और अपराधी की पहचान करने के लिए

 

Anatomical or academic autopsies

इस तरह के पोस्टमार्टम तब की जाती है जब कोई व्यक्ति अपने मौत से पहले यह अनुमति दे देता है कि उसके जाने के बाद उसके शरीर पर अन्य तरह का शोध किया जा सकता है, तब उसे एजुकेशन के उदेश्य से इस पर रिसर्च की जाती है।

रिसर्च के दौरान उस डेड बॉडी पर कई तरह के मेडिकल अध्ययन होती है जिससे कई तरह के सवाल और तकनीक का उदय हो पाती है। लंबे समय तक शरीर को सुरक्षित और ताजा रखने के लिए सब काम प्रिजर्व करके की जाती है।

यह आमतौर पर एक लावारिस शव पर किया जाता है, जिसे नगरपालिका या ऐसे अन्य सरकारी प्राधिकरण द्वारा फोरेंसिक विभाग को सौंप दिया जाता है।

  • मेडिकल छात्रों द्वारा मानव शरीर की सामान्य संरचना को सीखने का उदेश्य
  • शरीर की बनावट का अध्ययन करने के लिए एनाटोमिस्ट की देख-रेख में छात्रों के बीच प्रदर्शन की जाती है।

 

Virtual or medical imaging autopsies

यह एक डिजिटल ऑटोप्सी परीक्षण है जिसमें डिजिटल इमेजिंग तकनीक, जैसे Computed tomography (CT) या Magnetic resonance imaging (MRI) स्कैन का उपयोग मानव मृत शरीर की जाँच की जाती है,

जिसमें किसी भी तरह का चीर-फाड़ नही की जाती है, बल्कि यह प्रक्रिया विर्चुयल होती है।

डिजिटल ऑटोप्सी का सीधा सा मतलब है डिजिटल टूल्स द्वारा computerized environment में पोस्टमार्टम करना। थ्री डायमेंशनल मेडिकल विज़ुअलाइज़ेशन एक तकनीकी है जिसके जरिये शरीर के अंदर 3D के जरिये सभी चीजे साफ-साफ देखी जाती है।

 

भारत में पोस्टमार्टम नियम

भारत में कई तरह के पोस्टमार्टम के नियम बनाई गई है, जिसमें पिछले वर्ष 2021 में केंद्र सरकार ने इस पर संसोधन भी किया है जो निम्न है: –

  • ऑटोप्सी यानि शव परीक्षण तब तक नही की जा सकती है, जब तक मृत व्यक्ति के परिजन इसके लिए सहमत नही हो और वह पंचनामा पर अपना हस्ताक्षर नही कर देते है।
  • इस दौरान उन सभी परीक्षण का विडियो रिकोडिंग करना आवश्यक है।
  • अंगदान के लिए पोस्टमार्टम प्राथमिकता के आधार पर करने का नियम है।
  • पहले सूर्यास्त के बाद पोस्टमार्टम करने का नियम नही थी, लेकिन 15 नवंबर 2021 को केंद्र ने इसमें संसोधन कर कहा कि जिन हॉस्पिटल के पास इसे रात में करने की सुविधा है वह कर सकते है।
  • हालांकि, जब तक कानून-व्यवस्था की स्थिति न हो, तब तक हत्या, आत्महत्या, बलात्कार, क्षत-विक्षत शरीर, संदिग्ध बेईमानी जैसी श्रेणियों के तहत रात के समय पोस्टमॉर्टम नहीं किया जाना चाहिए।

 

Postmortem क्यों किया जाता है

ऐसे बहुत सारें कारण है, जिसके वजह से किसी भी शरीर का पोस्टमार्टम किया जाता है: –

  • मृतक की पहचान करने के लिए
  • मौत का कारण पता करने के लिए
  • डेड बॉडी की उम्र पता करने के लिए
  • मृत्यु के तरीके की पुष्टि करने के लिए
  • ऑर्गन ट्रांसप्लांट करने के लिए
  • घाव बनाने वाली वस्तु की पहचान करने के लिए
  • मृत्यु में इस्तेमाल की गई वस्तु का पहचान करने के लिए
  • शव पर प्राप्त घाव और मौत के बीच का समय अंतराल पता करने के लिए
  • महिला के शरीर पर बाल, दाग और वीर्य द्रव जैसे ट्रेस का पता लगाने के लिए
  • व्यक्ति की मौत किस तरीके, कहाँ, कब और कैसे की गई उन सभी बातों का दस्तावेज़ तैयार करने के लिए

 

Postmortem Examine का कारण

बहुत से लोग मानते हैं कि मृत्यु के कारण के बारे में अनिश्चितता होने पर ही शव परीक्षण किया जाना चाहिए।

हालांकि यह शव परीक्षण का एक वैध कारण है, यह एकमात्र कारण नहीं है। ऑटोप्सी एग्जामिन परिवार और कानून को आश्वस्त करने वाली हो सकती है, लेकिन इसके पीछे और कारण छुपी हुई रहती है: –

  • नैदानिक उद्देश्य – Diagnostic Purposes
  • शैक्षिक उद्देश्य – Educational Purposes
  • गुणवत्ता आश्वासन – Quality Assurance
  • अनुसंधान प्रयोजनों – Research Purposes
  • केवल तकनीकी – Technical Only
  • धार्मिक विचार – Religious Considerations

 

पोस्टमार्टम अंतराल – Postmortem interval

पोस्टमार्टम अंतराल से मृत्यु कब हुए उसका पता लगाया जाता है। मृत्यु के कारण और समय पता लगाने के लिए अलग-अलग तरीके और तकनीको का इस्तेमाल किया जाता है।

मृत्यु के बाद शरीर मे कई प्रकार के बदलाव आते है। यह बदलाव पोस्टमार्टम अंतराल का पता लगाते है

  • Alger Mortis – शरीर का ठण्डा पड़ना।
  • Riagar Mortis – शरीर के अंगो का अकड़ना।
  • Forensic entomology – जो जिव और कीटानु शरीर पर आते है।
  • शरीर का गलना शरीर मे पाए जीवाणु के करण शरीर गलने लगता है।
  • Livor mortis – शरीर का खून गुरुत्वाकर्षण के करण निचे शरीर के हिस्सों मे जमा हो जाना।

 

Postmortem कौन करता है

जैसा कि हमने आपको पहले भी बताया था कि पोस्टमार्टम पैथोलॉजिस्ट और उनके टीम करते है। हालांकि यह भी एक सामान्य डॉक्टर ही होते है, लेकिन इनको शव परीक्षण दिया जाता है जिसके अनुभव के बाद ही यह डेड बॉडी का ऑटोप्सी करते है।

कभी-कभी अधिक तकनीक का इस्तेमाल कर इस काम को अंजाम देने के लिए MRI expert और CT scan expert का भी सहारा ली जाती है।

हालांकि फोरेंसिक लैब में इस तरह के उपकरण पहले से ही मौजूद होती है और उसे ओपेरेट करने वालें डॉक्टर भी, जो अपने-अपने काम को करते है।

ऐसा हमें सुनने को मिलती है कि महिला मृत शरीर के लिए महिला पैथोलॉजिस्ट और पुरुष मृत शरीर के लिए पुरुष पैथोलॉजिस्ट ही पोस्टमार्टम करते है,

लेकिन यह काफी हद तक सही भी नही है, क्योंकि मरने के बाद डॉक्टर के लिए वह बस एक मृत शरीर होती है

और उन्हे लिंग से कोई मतलब नही होती है, उनका काम उनके शरीर के हर एक अंग की जांच कर उसका रिपोर्ट तैयार कर पुलिस और उनके परिजन को देना होता है। इस तरह के काम जिला अस्पताल में ही होती है। बड़ी-बड़ी हॉस्पिटल में भी यह सुविधा उपलव्ध रहती है।

 

पोस्टमार्टम उपकरण  –  List of instruments used in postmortem

नीचे उन उपकरणों का लिस्ट दी गई है जो पैथोलॉजिस्टों के द्वारा डेड बॉडी का पोस्टमार्टम करते समय इस्तेमाल की जाती है: –

Bone cutting forceps Bone holding forceps Chisels
Clamps Dissecting forceps Dressing scissors
Gouges Mallets Needle holders
Retractors Saws Scissors
Stripping forces Suture needles Scalpel handles

 

Postmortem कैसे किया जाता है

इस तरह का शारीरक परीक्षण करने की जरूरत तब पड़ती है, जब किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है, लेकिन उसके मौत का पता नही चल पाती है, जिसमें लोगों को हत्या, आत्महत्या, बलात्कार और ऐसी मौत जिसमें वजह साफ नही होती है, तब उस शव का postmortem किया जाता है।

हालांकि हर दिन लाखों लोगों की मृत्यु होती है, लेकिन उसमें सिर्फ उन्ही लोगों के शरीर का ऑटोप्सी किया जाता है जिसके मौत का कारण, तरीका, समय आदि चीजे पता करना होता है।

यह सब करने से पहले उनके परिजन से अनुमति लेनी होती है और उसका पंचनमा बनता है,

जिस पर आस-पड़ोस के कम से कम पाँच लोगों का हस्ताक्षर होती है। यह काम होने के बाद ही पुलिस द्वारा डेड  बॉडी को जिला अस्पताल भेजती है जिसके साथ पुलिस सर्जन भी उपस्थित रहते है, कभी-कभी उन्हे लवारीश लाश भी मिलती है,

जिनका शव परीक्षण बड़े अधिकारी के आदेश आने के बाद करते है जिससे उसके मृत्यु के कारण का पता लगाया जाती है। अगर उस लवारीश शव के लिए कोई दावा नही करता है तब उसके शरीर में मौजूद महत्वपूर्ण अंग जो काम की लायक है उसे निकाल ली जाती है।

किसी भी आपराधिक मामलें में पोस्टमार्टम रिपोर्ट की सबसे अधिक अहमियत होती है। Postmortem रिपोर्ट के माध्यम से ही पुलिस मौत का कारण जान पाती है। इसमें मृतक को जहर देकर मारा गया है या फिर उसकी मौत मारपीट या फिर अन्य वजह से हुई इसका पता लग जाता है

मृतक से जुड़े सभी साक्ष्य रिपोर्ट के अनुसार कोर्ट में पक्ष रखने में मदद मिलती है और उसके अनुसार पकड़े गए अपराधी को सजा दिया जाता  है। पोस्टमार्टम दो तरीकों से किया  जाता  है: –

 

External Examination – बाहरी परीक्षण

जब सारी औपचारिकता नियम पूर्ण हो जाता  है तब डेड बॉडी को फोरेंसिक लैब में लाई जाता  है और सबसे पहले उसके शरीर के कपड़े को अच्छी तरह से जांच की जाता  है कि इसमें कोई ऐसा चीज तो नही है जो सबूत बन सकती है।

साथ ही उस कपड़े से किसी प्रकार का दूरगंध तो नही आ रही है, मृतक ने किसी मादक पदार्थ का सेवन तो नही किया है, कपड़े कहाँ से फटे-कटे है। इस प्रक्रिया को पूर्ण होने के बाद शरीर पर से सभी कपड़े को निकाल दिया जाता है

चाहे वह किसी भी जेंडर का हो और शरीर के बाहरी अंग तथा त्वचा आँख, कान, पैर का तलवा, उंगली, गर्दन, प्राइवेट पार्ट चेक की जाती है कि इसमें नुकसान तो नही हुई है। इसके अंतर्गत निम्नलिखित परीक्षण करना आवश्यक है: –

  • मृत शरीर का लिंग
  • शरीर का विकास
  • शरीर की पौष्टिकता
  • उसका उम्र
  • त्वचा का रंग
  • सूजन तथा घाव
  • शरीर पर मौजूद तिल, गाँठ
  • शरीर के सभी छिद्रों आदि का पूर्ण सतर्कतापूर्वक परीक्षण

इस तरह का परीक्षण करने का मुख्य उदेश्य मौत के पीछे का वजह, जहर, फाँसी, आग, मार-पीट, शारीरिक संबंध इत्यादि का विधि पता करना होता है।

जिसे postmortem report में दर्ज की जाती है। जब एक्सटर्नल एगजामिन से मौत का कारण नही पता चल पाती है तब अगली परीक्षण का सहारा ली जाती है।

उदाहरण के रूप में अगर किसी व्यक्ति के मौत फाँसी लगने से दर्शायी गई है तब उसके गले पर बने निशान मौत की गुत्थी को सुलझा देती है। अगर वह आत्महत्या करता है

तब उसके गले पर ” V तरह के निशान बन जाती है अगर उसके साथ कोई जबर्दस्ती कर रस्सी से यह काम करती है तब ” O जैसा निशान बन जाती है।

 

Internal Examination – आंतरिक परीक्षण

सबसे पहले डेड बॉडी को टेबल पर पीठ के बल लेटा लिया जाता है, अगर मृतक को सिर में अपराधियों ने गोली मारी है तब उसके मस्तिष्क को आरी जैसा उपकरण से काटा जाता  है और अच्छे से उसका निरीक्षण की जाता  है।

यह बात ध्यान देने वाली है कि अधिकतर मामलों में पूरे शरीर का पोस्टमार्टम नही होती है, बल्कि अगर कोई बाहरी ज़ख़म देकर हत्या की गई है

तब उसके आस-पास के अंगों की ही जांच की जाती है। अगर पूरे शरीर का पोस्टमार्टम करना होता है तब उन्हे I या Y shaped में काट दी जाती है।

I shaped इस आकार का चीरा पूरा दुनिया में प्रचलित सबसे आम चीरा है। जिसमें शरीर को नग्न स्थिति में रखकर कंधे के नीचे एक लकड़ी का टुकड़ा  रखा जाता है। जिसके बाद गर्दन से लेकर नाभि होते हुये प्राइवेट पार्ट तक एक दम सीधा फाड़ दिया जाता है।

जिससे Breast और Abdominal cavity  को पूरी तरह से दिखने लग जाती है। हालांकि गर्दन की संरचना का एक्सपोजर side end की ओर थोड़ा सीमित हो जाता है और शरीर के पिछले हिस्से में कोई जोखिम नहीं होता है, इसलिए पेट के पीछे की संरचनाओं की खोज थोड़ा बोझिल रहती है।

Y shaped : – इसमें भी कंधे के नीचे लकड़ी रखी जाती है और शरीर को पूरा नग्न स्थिति में रखी जाती है। चीरा एक्रोमियन प्रक्रियाओं की नोक से शुरू होता है, द्विपक्षीय रूप से स्तनों के नीचे से xiphoid प्रक्रिया तक गुजरता है।

वहां से चीरा नाभि के पास विचलन के साथ Symphysis pubis तक जाता है। चीरा का ऊपरी भाग ऊपर की ओर reflected होता है और चीरा का निचला भाग अलग से और बाद में गहरी गुहाओं को उजागर करने के लिए reflected होता है।

जिसके बाद शरीर के आंतरिक महत्वपूर्ण अंग  जैसे फेफड़ा, हार्ट, लिवर, पेट, छोटी आंत, बड़ी आंत इत्यादि की जांच की जाती है। जिसमें मौत होने के कारण छुपे रहते है जिससे उसे सबूत के तौर पर पेश की जाती है जिससे मौत का असली वजह पता चल पाती है।

अब अंदरूनी अंगो की जांच करने की बारी आती है। सबसे पहले पेट और आंतो को छोड़कर सभी अंगो का वजन किया जाता है।

इसके बाद पेट और आंतो को दबाकर इनमें मौजूद अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकाला जाता है। अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु भोजन में मिले जहर खाने से हुई हो तो भोजन के सैंपल को जांच के लिए रख लिया जाता है।

जब पूरा जांच हो जाती है तब उसके सारे सैंपल को रख लिए जाते है और आगे तब टेस्ट के लिए भेज दी जाती है। उसके बाद अंधरूनी अंग जो काम की होती है

उसे आदेश मिलने पर निकाल ली जाती है और फ्रिज में रख दी जाती है अन्यथा सभी अंग जहां अवस्थित होती है वहाँ उसी तरह से रख दी जाती है।

जब सभी आंतरिक अंग को शरीर के अंदर रख दी जाती है तब उसे जिग-जाग पैटर्न में सील दी जाती है और अगर उसमें से कोई अंग निकाली गई है तब उसके जगह रुई भर दी जाती है।

सभी परीक्षण होने के बाद डेड बॉडी को पुलिस के हवाले कर परिजन को सौप दी जाती है जिसके बाद रिपोर्ट तैयार की जाती है।

 

पोस्टमार्टम में कैसे पता चलती है कि सुसाइड है या मर्डर

फोरेंसिक डॉक्टर द्वारा इस बात की पता शरीर के आंतरिक अंग से लगाई जा सकती है कि व्यक्ति की मौत किस तरीके से हुई है। इसके लिए वह अलग-अलग विधि का इस्तेमाल करते है।

लीवर

अगर कोई व्यक्ति जहरीला पदार्थ खा लेता है तो उसका लिवर कुछ ही समय में खराब हो जाता है। अगर किसी व्यक्ति को जहर देकर अपराधी घटना को अंजाम दिया जाता है तब उसका पता लगाने के लिए लीवर सर्जरी किया जाता है

अगर उसमें किसी भी प्रकार का जहरीली पदार्थ मिल जाती है तब वह समझ जाते है कि इसे जहर देकर घटना को अंजाम दी गई है। इसके साथ ही अगर यह मर्डर है तब यह भी देखा जाता है कि मुंह पर अलग-अलग किस्म का दाग है की नही, क्योंकि इससे जबरदस्ती जहर देने के सारांश मिल जाती है।

फेफड़ा

अगर किसी व्यक्ति को पानी में डुबाकर मारा गया है, तब उसके फेफड़ा में डायटम मिलती है। यह पानी में मिलने वाली एक सूक्ष्म जीव होते है जिसे हमारी  आंखे नही देख पाती  है। जब किसी व्यक्ति को पानी में डुबाकर घटना को अंजाम दिया जाता है,

तब वह सांस नही ले पता है और उसके फेफड़ो  में पानी भर जाता  है, जब उसकी मौत हो जाती है तब उसमें मिलने वाली डायटम से यह पता लगाया जाता है कि यह एक हत्या है। इसके अलावा अगर मारने के बाद उसका शव पानी में  मिलती है और उसमें डायटम नही पाई जाती है तब भी यह हत्या होती है, क्योंकि मरने के बाद शरीर के अंदर पानी नहीजाता है।

फांसी:

अगर कोई व्यक्ति आत्महत्या कर रस्सी से फांसी लगा लेता है तब उसके गले पर V shaped (आत्महत्या) बन जाता है, अगर जबरदस्ती नीचे रस्सी से दमघुट के  मारा जाता   है तब O shaped (गला घोटने पर)है, जिसका मतलब यह हत्या है, अगर यह करने के बाद आत्महत्या जैसा प्रतीत होती  है तब उसके गले पर बने यह निशान बता देती है कि यह क्या है

आग

अगर किसी व्यक्ति की आग के जरिये हत्या किया  जाता है तब उसमें भी दो पहचान होता है, अगर पैर के नीचे का तलबा पूरी तरीके से जल गया  है तब उसे  मारने के बाद आग लगाने की रिपोर्ट दी जाती है, अगर किसी जिंदा व्यक्ति को ऐसा किया जाता है तब वह भागता है, जिससे उसका तलबा बच जाता है।

 

Postmortem kaise karate Hai In Hindi Video

 

FAQ’s – Postmortem Hindi

सवाल : रात में पोस्टमार्टम क्यों नहीं होता है
जवाब : डॉक्टरों को रात में पोस्टमार्टम न करने की असली वजह रोशनी होती है क्योंकि रात में ट्यूबलाइट, एलईडी की कृतिम रौशनी में चोट का रंग लाल की बजाए बैगनी दिखाई देता है। फोरेंसिक साइंस में बैगनी चोट होने का उल्लेख नहीं है। वहीं कई धर्मों में रात को अंत्येष्टि नहीं होता , इसलिए कई लोग भी रात को पोस्टमार्टम नहीं करवाते हैं।

सवाल : पोस्टमार्टम में शरीर का कौन कौन सा अंग निकाला जाता है
जवाब : जब डेड बॉडी बनने के तह तक जाना होता है तब शरीर के बाहरी और आंतरिक दोनों परीक्षण में सभी अंगों को अच्छी तरह से देखा जाता है। आंतरिक परीक्षण में शरीर से फेफड़ा, हार्ट, लिवर, पेट, छोटी आंत, बड़ी आंत इत्यादि को बाहर कर दिया जाता है। जरूरत पड़ने पर इसके जगह बाद में रुई रखकर सील दिया जाता है।

सवाल : पोस्टमार्टम रिपोर्ट कितने दिन में आती है
जवाब : हालांकि कि पहले पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने में 2 महीने तक का समय लग जाता है, लेकिन अब यह प्रक्रिया में तेजी आई है। अब इसका रिपोर्ट 7 दिनों के भीतर आ जाता है जिसे ऑनलाइन भी देखा जा सकता है। इसके अलावा जिला अस्पताल जहाँ शव परीक्षण हुई थी वहाँ से पता लगाया जा सकता है।

सवाल : पोस्टमार्टम कराने का कितना पैसा लगता है
जवाब : सरकारी अस्पतालों में इसका कोई फोरेंसिक चार्ज नही लगती है, लेकिन पर्ची और अन्य चीजों का शुल्क देनी होती है। जिससे उनके परिजन से 2 हजार रुपया तक चार्ज की जाती है। वही अगर प्राइवेट हॉस्पिटल में यह परीक्षण करवाते है तब 10 हजार से ऊपर तक रुपया लग जाती है

सवाल : फांसी के बाद पोस्टमार्टम क्यों किया जाता है
जवाब : यह इसलिए होता है कानूनी प्रक्रिया के दौरान बाद में फांसी के अलावा कोई और विवाद ना हो। यह सुनिश्चित करना एवं व्यक्ति के मृत्यु के दस्तावेजों में मृत्यु का कारण फांसी ही होना चाहिए, इसलिए फांसी के बाद पोस्टमार्टम किया जाता है।

किसी भी व्यक्ति की मौत की सजा कानूनी प्रक्रिया के अनुसार ही दी जाए यह प्रक्रिया न्याय निष्पक्ष और तर्क के आधार पर हो और पोस्टमार्टम से या सुनिश्चित हो सकेगा कि जिस व्यक्ति को फांसी दी गई है वह न्याय निष्पक्ष और तर्कों पर आधारित थी


Conclusion

इस लेख में आपने Postmortem kaise hota hai | पोस्टमार्टम क्या होता है ? के बारें में जाना। आशा करते है आप पोस्टमार्टम क्यों और कैसे किया जाता है की पूरी जानकारी जान चुके होंगे।

आपको लगता है कि इसे दूसरे के साथ भी Share करना चाहिए तो इसे Social Media पर सबके साथ इसे Share अवश्य करें।

और इस विषय संबंधित कोई भी सवाल आप के मन में होगा तो निचे कमेंट में बताये हम आप के कमेंट का जरूर जवाब देंगे | शुरू से अंत तक इस Article को Read करने के लिए आप सभी का तहेदिल से शुक्रिया…

 

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