सोनोग्राफी रिपोर्ट कैसे पढ़े इन हिंदी | अल्ट्रासाऊंड रिपोर्ट कैसे समझे

सोनोग्राफी रिपोर्ट कैसे पढ़े इन हिंदी | अल्ट्रासाऊंड रिपोर्ट कैसे समझे अल्ट्रासाउंड के रूप में जानी जाने वाली सोनोग्राफी या अल्ट्रासोनोग्राफी एक चिकित्सीय निदान का महत्वपूर्ण साधन है,

जिसकी मदद से गर्भावस्था में गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य और पेट से संबन्धित बीमारी के बारे में जानकारी की प्राप्ति  और सर्वाधिक प्रयोग में लाने जाने वाली विधि है।

जो उच्च आवृत्ति ध्वनि तरंगों (High frequency sound waves) का उपयोग कर दिल जैसे शरीर के अंदरूनी हिस्सों की छवि (image) बनाती है।

ये प्रक्रिया सुरक्षित है क्योंकि इसमें विकिरण (radiation) की जगह ध्वनि तरंगों (sound waves) का इस्तेमाल किया जाता है।

अल्ट्रासाउंड-स्कैन्स का उपयोग सामान्य तौर पर गर्भावस्था के दौरान गर्भ में पल रहे बच्चे की छवि लेने के लिए किया जाता है। अल्ट्रासाउंड-स्कैन्स का उपयोग दिल की परेशानियों का पता लगाने, साथ ही शरीर के अन्य हिस्सों जैसे लिवर, किडनी और पेट की जांच करने में भी किया जाता है।

साधारण लोगों को अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में सिर्फ काले और उजले दाग-धब्बे जैसे ही दिखाई देती है, लेकिन उसी के अंदर शरीर के अंदर मौजूद पार्ट या फिर गर्भावस्था के दौरान बच्चे के बारें में पता लगाई जाती है, जिसे डॉक्टर तुरन्त पढ़कर रोगी को बता देते है कि आपके शरीर में ऐसी समस्या उत्पन्न हो गई है।

हालांकि सोनोग्राफी का उपयोग अक्सर शरीर में मौजूद बीमारी के बारें में पता लगाने के लिए ही किया जाता है।

अगर कोई व्यक्ति और जाँच घर इस तकनीक का सहारा लेकर गर्भावस्था के दौरान शरीर में मौजूद बच्चे के लिंग के बारें में पता लगाने की कोशिश करते है तब यह कानूनन अपराध है।

हाल ही में आपका या आपके घर में किसी का सोनोग्राफी (ultrasound) हुई है और आप बिना डॉक्टर की मदद लिए उसके बारें में जानना चाहते है कि इसका रिपोर्ट क्या निकल के आई है। तब आप इस आर्टिकल को पूरा पढ़कर Ultrasound report kaise padhe के बारें में जान सकते है।

अगर आपको सोनोग्राफी रिपोर्ट में सबकुछ काला-काला ही दिखता है तो चलिए बेसिक से समझते हैं जिससे आप समझ सके कि आखिर आप देख क्या रहे हैं और इसे देखने का सही तरीका क्या है सोनोग्राफी रिपोर्ट कैसे पढ़े इन हिंदी

 

अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट कैसे समझे | सोनोग्राफी रिपोर्ट कैसे पढ़े इन हिंदी – Ultrasound Report kaise samjhe

इसके रिपोर्ट को पढ़ने से पहले हम इसके कुछ बेसिक बातों को समझ लेते है, जिससे हमें आगे की प्रक्रिया को समझने में आसानी होगी।

देखिये सोनोग्राफी एक डिवाइस यानि उपकरण है जो मानव शरीर के अंदरूनी जीवों की लाइव छवियाँ (live image) बनाने के लिए Sonar and radio technology का उपयोग करता है।

 

पेट की सोनोग्राफी
पेट की सोनोग्राफी

 

अल्ट्रासोनोग्राफी मेडिकल टेस्ट है जो सोनोग्राफी नाम के डिवाइस का उपयोग करके बनाई जाती है। इसका प्रयोग सबसे आम तौर पर गर्भवती महिलाओं की छवियों को दिखाने के लिए भ्रूण इमेजिंग (fetal imaging) को देखने के लिए बनाई जाती है।

हालांकि, यह मेडिकल टेस्ट विभिन्न बीमारियों और शर्तों के निदान और उपचार में भी प्रयोग किया जाता है। आमतौर पर, यह टेस्ट बाहरी रूप से किया जाता है, लेकिन कुछ मामलों में, शरीर के अंदर एक अल्ट्रासाउंड डिवाइस रखा जाता है। इसका टेस्ट भी तीन तरह से होती है।

  1. बाहरी अल्ट्रासाउंड (external ultrasound) इसका उपयोग महिलाओं के गर्भ में पल रह बच्चे या फिर मानव दिल की जाँच के लिए किया जाता है। इसमें ट्रांसड्यूसर(Transducer) नाम का हाथ में पकड़े जाने वाला एक छोटा सा उपकरण आपकी त्वचा पर रखकर फिर शरीर के उस हिस्से के ऊपर घुमाया जाता है, जिसकी जांच होती है।
  2. आंतरिक अल्ट्रासाउंड (internal ultrasound) अंदरूनी जाँच जैसे प्रोस्टेट ग्लैंड, अंडाशय या गर्भाशय की जाँच इस विधि के जरिये बेहतर से कर पाते है। जिसमें ultrasound probe योनि या मलाशय में रखा जाता है जिससे इमेज स्क्रीन पर आती जाती है। इसमें मरीज को कुछ असुविधा होती है, लेकिन उनको किसी भी तरह के दर्द से गुजरना नही पड़ता है।
  3. एंडोस्कोपिक अल्ट्रासाउंड (endoscopic ultrasound) ऐसी जाँच के क्रम में एक लम्बी, पतली और लचीनी ट्यूब जिसे एंडोस्कोप बोली जाती है वह मरीज के मुँह में डाल दी जाती है। इसके ज़रिए पेट, ग्रासनली या फिर मरीज के सीने की लसीका ग्रंथियों (lymph nodes) जैसे हिस्सों की जांच की जाती है।

मरीज को जिस भी तरह की शरीर के अंदर पीड़ा होती है उसके बारें में पता लगाने के लिए ऊपर में बताई गई अलग-अलग तरहों की विधि का प्रयोग में लाई जाती है। यहाँ तक समझे के बाद अब हम सोनोग्राफी रिपोर्ट पढ़ने के बारें में विस्तार से जानते है।

 

कैसे अल्ट्रासाउंड पिक्चर पढ़ें  (Read an Ultrasound Picture)

Baby boy सोनोग्राफी रिपोर्ट कैसे पढ़े इन हिंदी : सोनोग्राफी टेस्ट के जरिये महिलाओं के शरीर के अंदर गर्भावस्था के दौरान पल रहें बच्चा का लिंग और उसका अध्ययन करने के लिए किया जाता है साथ ही साथ लीवर, गॉलब्लैडर, थायरॉइड ग्रंथि, लसिका ग्रंथि, अंडाशय, टेस्टिस, स्तन, रक्त वाहिकाओं, जोड़, लिग्मेंन्ट्स और टेंडन्स में उत्पन्न हो रही बीमारी के बारें में पता लगाने के लिए किया जाता है।

जब भी आप Sonography report देखते है तब आपको उसमें काला-उजला रंग का धब्बा ही दिखाई देता होगा, लेकिन उसी के बीच में मरीज के अंदर मौजूद पीड़ा के बारें में पता लगाई जाती है। दरअसल ऐसा रंग हवा और बाहरी फ्लूइड से बन जाती है। साथ ही ग्रे रंग की दिखने वाली हिस्सा शरीर की कोशिका होती है।

 

Baby boy सोनोग्राफी रिपोर्ट कैसे पढ़े इन हिंदी
Baby boy सोनोग्राफी रिपोर्ट कैसे पढ़े इन हिंदी

 

छोटे-छोटे उत्तकों (tissues) से मिलकर एक कोशिका (cell) का निर्माण होती है। उत्तक शरीर के हिस्से में जितना अधिक ठोस होगा उतना ही अधिक अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट चमकीला और देखने में सफ़ेद दिखाई देगा, लेकिन जो सबसे अधिक सफ़ेद होती है वह हड्डी होती है।


स्टेप 1 – सोनोंग्राफी इमेज रिपोर्ट में आपको कुछ नंबर और नाम दिखाई देती है, दरअसल वह जाँच घर का नाम, रेस्ट रिफरेंस नंबर और इस मशीन की सेटिंग का डिजिट लिखी हुई होती है, लेकिन आपको इस बात को ध्यान में रखना होगा कि इस जानकारी से मरीज के रिपोर्ट से कुछ लेना-देना नही है


स्टेप 2 – इसकी रिपोर्ट देखने से पहले इसके इमेज के ऊपरी हिस्से से शुरुआत करनी होगी, जो यह दर्शाती है अल्ट्रासाउंड का प्रोब कहाँ रखा गया है। यानि मरीज के पेट के ऊपरी हिस्से में जो उपकरण रखी गई है उसे किस तरह रखा गया है और वह उत्तक और ऑर्गन साइड कैसे दिखता है।

अगर आप यूट्रस अल्ट्रासाउंड का रिपोर्ट देख रहें है तब आपको इसके रिपोर्ट इमेज में सबसे ऊपरी सतह पर यूट्रस के ऊपर का उत्तक आउटलाइन दिखाई देगी और नीचे देखने पर Deep Tissue दिखेगे और Uterus lining और गर्भ के पीछे का हिस्सा आपको दिखाई देता हुआ प्रतीक होगा।

सोनोंग्राफी बॉडी अन्दर इमेज बनाने के लिए Ultrasound waves का प्रयोग करता हैं इसलिए ज्यादातर इमेज साफ नहीं रहतीं, सोनोग्राफी रिपोर्ट पढ़ने के लिए आपको इसमें होने वाले कुछ इफेक्ट्स को भी समझना होगा। अलग अलग विजुअल इफेक्ट्स अल्ट्रासाऊंड की सेटिंग, एंगल, और टिशू की डेंसिटी से भी आते है


स्टेप 3 – जैसा कि हमने पहले भी जाना था कि अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट मात्र दो रंग काला और सफ़ेद में ही होती है लेकिन दोनों रंग का इफैक्ट अलग-अलग होती है इस बात को अपने ध्यान में रखना होगा। ये रंग में अंतर उन मटीरियल की डेंसिटी के अंतर से आता है जिनसे साउंड होकर गुजरती है।

ठोस उत्तक (tissue) दिखने वाली एरिया में हड्डी होगी जो आपको सफ़ेद नज़र आयेगी। साथ ही वह उत्तक जिसमें तरल पदार्थ भरा हुआ रहता है गर्भाशय में एमनीओटिक फ्लूइड (amniotic fluid) डार्क या गहरे कलर के नजर आएगी।


स्टेप 4 – जब भी मरीज को जाँचघर के द्वारा उल्टासाउंड किया जाता है तब उसे मिरर (दर्पण, आईना) के जैसे इमेज को उल्टा कर दिया जाता था, इसलिए आपको यह ध्यान में रखना होगा कि आप रिपोर्ट और बॉडी के किस ओर से देख रहें है।

अगर आप रिपोर्ट देखना लेफ्ट साइड से शुरू करते है तब मिरर के रूप में वह हिस्सा रिपोर्ट में राइट साइड में दिखाई देगी। फिर भी आपको समझ में नही आ रही है तब आप किसी लैब टेकनीशियन या डॉक्टर की हेल्प ले सकते है।


स्टेप 5 – sonography human body structure की इमेज बनाने के लिए ध्वनि का इस्तेमाल करती है, जिससे इमेज साफ दिखाई नही देती है। बहुत सारे अलग-अलग विसुअल इफ़ेक्ट अल्ट्रासाउंड की सेटिंग, एंगल, या जांचे टिश्यू की डेंसिटी की वजह से बनते हैं।

नीचे कुछ सबसे आम विसुअल इफ़ेक्ट जिनके लिए आपको नजर रखनी चाहिए: –

  • एनहांसमेंट (Enhancement) ये तब होता है जब बॉडी का कोई हिस्सा एक्स्ट्रा फ्लूइड की वजह से ज्यादा ही ब्राइट (bright) नजर आता है, जैसे किसी गांठ या सिस्ट (cyst) में।
  • अटेनुएशन (Attenuation) इसे शैडोइंग (shadowing) भी कहते हैं, ये इफ़ेक्ट तब होता है जब, स्कैन किया जा रहा एरिया जरूरत से ज्यादा डार्क नजर आता है।
  • एनिसोट्रॉपी (Anisotropy) ये इफ़ेक्ट प्रोब (probe) के एंगल की वजह से बनता है। जैसे प्रोब को किसी टेंडन के ठीक 90° डिग्री पर रखने से ये नार्मल से बहुत ज्यादा ब्राइट नजर आता है, इसलिए इस इफ़ेक्ट से बचने के लिए प्रोब के एंगल को एडजस्ट (adjust) करने की जरूरत होती है।

 

अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट कैसे पढ़ें | How to Read Ultrasound Report in Hindi

सोनोग्राफी रिपोर्ट पढ़ना आसान है, लेकिन इसके लिए आपको इंग्लिश और अपने भाषा की समझ होना जरूरी है, क्योंकि अधिकतर रिपोर्ट इंग्लिश में ही होती है। जिसमें आपके पेट के अंदर सभी चीजों के बारें में एक अलग पेज पर रिपोर्ट बनाकर दी जाती है।

इसको अच्छी तरह से समझने के लिए हम आपके साथ एक मरीज का अल्ट्रासोनोंग्राफी का रिपोर्ट साझा करते है, जिससे आपको अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट को समझने में आसानी होगी।

नीचे जो भी बातें बताई होगी वह सब रिपोर्ट के आधार पर होगा। आपके केस मे भी इस तरह का रिपोर्ट हो सकती है।

 

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Liver: – जिगर आकार, समोच्च और प्रतिध्वनि बनावट में सामान्य है आईएचबीआर, पीवी और एचवी सामान्य हैं। इस कॉलम मे मरीज के लिवर या फिर आप भृण परीक्षण (प्रेगनेंसी टेस्ट) करवाएँ है तब बच्चा का लीवर के बारें में लिखा हुआ होगा कि उसका साइज़ कितना बड़ा हुआ है उसके बारें में लिखी हुई रहती है।

Gall Bladder: – गॉल ब्लैडर फैला हुआ है और दो इकोजेनिक इंटरफेस दिखाता है एक फंडल क्षेत्र में 1.26 सीएम और अन्य में माप गर्दन क्षेत्र मापने 1.83 सेमी। दीवार की मोटाई सामान्य है। इसमें पित्ताशय के बारें में लिखी हुई रहती है।

CMD: – जन्मजात मस्कुलर डिस्ट्रॉफी आकार और इकोटेक्स्चर में सामान्य है।

Spleen: – प्लीहा आकार और इकोटेक्स्चर में सामान्य है।

Pancreas: – अग्न्याशय आकार और इकोटेक्स्चर में सामान्य है।

Kidneys: – दायां गुर्दा मापने वाला 9.45 x 4.32 सेमी बायां गुर्दा 9 84 x 4.92 सेमी मापने वाला दोनों गुर्दे आकार की स्थिति और गूंज बनावट में सामान्य हैं कोई कैलकुली / बैकप्रेशर परिवर्तन नहीं देखा गया है।

Urinary Bladder: – मूत्र मूत्राशय मध्यम रूप से फैला हुआ है और सामान्य रूप दिखाता है।

Uterus: – गर्भाशय आगे की ओर बढ़ा हुआ आकार में बड़ा है। माप 10.9 x 8.04 x 5.05 सेमी। इकोटेक्स्चर और एंडोमेट्रियम सामान्य है। इसमें महिलाओं का यूट्रस के बारें में बताई जाती है कि वह साइज़ में कितना बड़ा हो गया है या फिर वह नॉर्मल साइज़ में ही है। साथ ही इसमें पल रहें बच्चा किस तरह पल-बढ़ रहा है और उसका हैल्थ कैसा है।

Ovaries: – अंडाशय आरओ माप: 3 53 x 2.38 सेमी एलओ माप 3.2 x 2.56 सेमी है। आकार में सामान्य। सामान्य इको बनावट। पेट की श्रोणि में कोई मुक्त द्रव नहीं देखा गया है।

Opinion: – कोलेलिथियसिस के साथ तीव्र कोलेसिस्टिटिस, बढ़े हुए गर्भाशय के बारे में पता लगाने के बारें में लिखी हुई रहती है।

 

अल्ट्रासाउंड कैसे कार्य करता | सोनोग्राफी कैसे की जाती हैं – Level 2 ultrasound in hindi

किसी पराश्रव्य उत्पादक स्रोत (ट्रान्सड्यूसर) के द्वारा उत्पन्न तरंग जब शरीर के अन्दर गमन करती है तो शरीर के विभिन्न भाग इसे कम या अधिक मात्रा में लौटा देते (परावर्तित/रिफ्लेक्ट) हैं। इन लौटी हुई तरंगों को एक स्कैनर में लिया जाता है

जो इन्हें विद्युत संकेतों में बदल देता है फिर ये विद्युत संकेत एक संगणक (कम्प्यूटर) में जाते हैं जो आवश्यक गणना करके उपयुक्त छवि (इमेज) का निर्माण करता है।

इससे सुक्ष्म तंरगें निकली है। अगर सिग्नल को ज्यादा समय लग रहा हैं वापस आने में तो यह संकेत देता है कि ऑब्जेक्ट भी नीचे की ओर हैं और उसके मुताबिक इमेज बनता है।

देखा जाएँ तो अल्ट्रासाउंड टेस्ट बिना दर्द के हो जाती है, क्योंकि इसमें शरीर के अंदर देखने के लिए और बिना किसी तरह के चीर-फाड़ किए या बिना किसी इंजेक्शन का प्रयोग में लाएँ ही पेसेंट के शरीर का टेस्ट कर लिया जाता है।

अल्ट्रासाउंड इमेजिंग भी सुरक्षित है क्योंकि कोई रेडिएशन शामिल नहीं है। इस प्रकार, गर्भावस्था के दौरान भ्रूण की जांच करना सुरक्षित है। एक सोनोग्राफी के लिए, डॉक्टर टेस्ट से पहले 12 घंटे तेज और पानी की पर्याप्त खपत की सिफारिश कर सकता है।

जब गर्भवती महिलाओं के योनि (Vagina) और पुरुषों के लिए गुदा (Rectum) की जांच के लिए एक ट्रांसड्यूसर वंड का उपयोग किया जाता है।

यह अल्ट्रासाउंड इमेजिंग परीक्षण Genitals की असामान्यताओं के निदान में मदद करता है। यह Reproductive Organs की तरह कुछ प्रकार के कैंसर का निदान करने के लिए भी प्रयोग किया जाता है।

 

रिस्क एंड कंट्राडिक्शन इन सोनोग्राफी – Ultrasonography

अल्ट्रासाउंड के साथ, आयनकारी विकिरण (ionizing radiation) के लिए कोई संपर्क नहीं है। इसलिए, रोगियों को अल्ट्रासाउंड परीक्षण के साथ शायद ही कभी जोखिम होता है। बाहरी अल्ट्रासाउंड में, रोगियों को किसी भी दुष्प्रभाव का अनुभव नहीं होता है।

हालांकि, आंतरिक अल्ट्रासाउंड के संभावित साइड इफेक्ट्स में दर्द, असुविधा और आंतरिक रक्तस्राव (internal bleeding) का मामूली जोखिम होता है। सोनोग्राफी टेस्ट का पूर्ण रूप देखा जायें तो यह अल्ट्रासाउंड टेस्ट सुरक्षित हैं।

 

अगले पोस्ट में हम अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में बीपीडी क्या है, Baby boy सोनोग्राफी रिपोर्ट कैसे पढ़े इन हिंदी, सोनोग्राफी टेस्ट फॉर जेंडर इन हिंदी, गर्भवती सोनोग्राफी जैसे विषय पर विस्तार में चर्चा करने की कोशिश करेंगे यदि आप भी सोनोग्राफी के बारे में Details में जानकारी प्राप्त करना चाहते है इस वेबसाइट को जरूर Subscribe कर लीजिये

 

Disclaimer

इस लेख में दी गई जानकारी विभिन्न विशेषज्ञों के अध्ययन और राय के साथ-साथ आम आदमी के स्वास्थ्य पर आधारित है। इस जानकारी को देने का उद्देश्य विषय से परिचित होना है। पाठकों को अपने स्वास्थ्य के आधार पर कोई भी निर्णय लेने से पहले डॉक्टर से सलाह जरूर लेनी चाहिए।

 

Conclusion

इस लेख में आपने सोनोग्राफी रिपोर्ट कैसे पढ़े इन हिंदी | अल्ट्रासाऊंड रिपोर्ट कैसे समझे | Ultrasound report kaise samjhe के बारें में जाना। आशा करते है आप अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट कैसे पढ़ें की पूरी जानकारी जान चुके होंगे।

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